एक घने जंगल के किनारे फेलिक्स नाम की एक लोमड़ी रहती थी। फेलिक्स बहुत चालाक थी, लेकिन उसकी चतुराई अक्सर दूसरों को धोखा देने में ही निकलती थी। एक बार भीषण गर्मी पड़ी और जंगल के सारे तालाब सूख गए। प्यास से बेहाल फेलिक्स पानी की तलाश में दूर निकल गई।
काफी देर भटकने के बाद, उसे एक पुराना कुआँ दिखाई दिया। 'ज़रूर इसमें पानी होगा!' फेलिक्स ने उत्साह से सोचा। वह कुएँ के किनारे पर पहुँची, लेकिन तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह धड़ाम से कुएँ के ठंडे पानी में जा गिरी। कुआँ बहुत गहरा था और फेलिक्स लाख कोशिशों के बाद भी बाहर नहीं निकल पा रही थी।
'बचाओ! कोई मुझे बचाओ!' फेलिक्स चिल्लाई। तभी पास की घास चरते हुए गिडियन नाम का एक बकरा वहाँ आया। कुएँ से आती आवाज़ सुनकर उसने कुएँ के अंदर झाँका।
"फेलिक्स! तुम नीचे क्या कर रही हो?" बकरे ने हैरानी से पूछा।
फेलिक्स के दिमाग में एक योजना आई। उसे पता था कि वह अकेले बाहर नहीं निकल सकती। उसने बकरे को बेवकूफ बनाने का फैसला किया। एक झूठी मुस्कान के साथ फेलिक्स बोली, "अरे दोस्त! तुम बाहर धूप में परेशान हो रहे हो, लेकिन यहाँ देखो! इस कुएँ में बहुत ही ठंडा और मीठा पानी है। मैं इसे पीकर बहुत खुश हूँ!"
बकरा बहुत प्यासा था। उसने पूछा, "क्या सच में? क्या यह पानी स्वादिष्ट है?"
"हाँ, बिल्कुल! तुम नीचे आकर खुद देख लो," फेलिक्स ने उसे लालच दिया। बकरा बिना सोचे-समझे कुएँ में कूद गया। पानी पीकर बकरा खुश हो गया और बोला, "फेलिक्स, तुमने सही कहा था! यह पानी तो बहुत लाजवाब है!"
तभी फेलिक्स ने कहा, "अब हम दोनों बाहर कैसे निकलेंगे? मेरे पास एक उपाय है। तुम पहले मेरी पीठ पर चढ़कर कुएँ से बाहर निकल जाओ। फिर मैं तुम्हारी पीठ पर चढ़कर बाहर आ जाऊँगी।"
बकरा फेलिक्स की बातों में आ गया। वह फेलिक्स की पीठ पर चढ़ा और कुएँ के किनारे तक पहुँच गया। जैसे ही बकरा ऊपर पहुँचा, फेलिक्स ने एक लंबी छलांग लगाई और कुएँ से बाहर निकल आई।
"फेलिक्स! अब मुझे भी ऊपर खींच लो!" बकरा नीचे से चिल्लाया।
फेलिक्स हँसते हुए बोली, "मूर्ख! जब मैं बाहर आ गई हूँ, तो मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकती हूँ? तुम्हें किसी पर भी भरोसा करने से पहले सोचना चाहिए था!" इतना कहकर फेलिक्स वहाँ से भाग गई। बकरा पछताते हुए वहीं खड़ा रह गया।
Moral
किसी की मीठी बातों पर भरोसा करने से पहले सावधानी से सोचना चाहिए।