एक सुंदर हरी-भरी घाटी में, एक किसान अपनी भेड़ों की रक्षा के लिए कुछ वफादार कुत्तों को रखता था। ये कुत्ते बहुत बहादुर थे; जब भी जंगल से भेड़िये भेड़ों पर हमला करने की कोशिश करते, कुत्ते उन्हें भगा देते थे। उनकी वजह से भेड़ें हमेशा सुरक्षित रहती थीं।
एक शाम, दिन भर की पहरेदारी के बाद सभी कुत्ते बहुत थक गए थे और एक बड़े पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे। तभी, झाड़ियों के पीछे से भेड़ियों का एक झुंड धीरे से बाहर निकला। वे हमला करने के बजाय बहुत ही मीठी आवाज़ में बात करने लगे।
'तुम लोग इतनी मेहनत क्यों करते हो?' एक भेड़िये ने पूछा। 'हम भी तुम्हारे दोस्त बनना चाहते हैं। इस ठंडे जंगल में भटकने से अच्छा है कि हम तुम्हारे साथ यहाँ शांति से रहें।'
थके हुए कुत्तों ने भेड़ियों की बातों पर भरोसा कर लिया। उन्होंने सोचा कि नए दोस्त मिल रहे हैं, इसलिए उन्होंने रास्ता दे दिया। 'अगर तुम हमारे दोस्त बनना चाहते हो, तो तुम्हारा स्वागत है,' कहकर उन्होंने द्वार खोल दिया।
जैसे ही भेड़िये अंदर आए, उनका असली रूप सामने आ गया। वे दोस्त बनकर नहीं, बल्कि शिकार करने आए थे। कुत्तों को संभलने का मौका ही नहीं मिला और भेड़ियों ने उन पर हमला कर दिया। उस सुरक्षित फार्म में अफरा-तफरी मच गई।
कुत्तों को बहुत देर से समझ आया कि हर मीठा बोलने वाला इंसान दोस्त नहीं होता।
Moral
मीठी बातें करने वालों पर आँख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।