एक सुंदर हरी-भरी घाटी में, एक बकरी अपने चार छोटे बच्चों के साथ रहती थी। बकरी बहुत समझदार थी और हमेशा अपने बच्चों को सिखाती थी, "हमेशा साथ मिलकर रहो और अजनबियों की मीठी बातों में मत आना।"
एक शाम, जब सभी बच्चे घास के मैदान में खेल रहे थे, एक नन्ही बकरी एक रंगीन तितली का पीछा करते-करते अपने परिवार से बहुत दूर निकल गई। वह एक घने झाड़ के पास पहुँच गई।
वहीं पास में एक भूखी लोमड़ी छिपी हुई थी। उसने अकेले बच्चे को देखा और उसे फंसाने की योजना बनाई। लोमड़ी बहुत प्यार से बोली, "प्यारी बच्ची! तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो? मेरे साथ चलो, मेरे पास बहुत सारे मीठे फल और शहद हैं, मैं तुम्हें खिलाऊँगी!"
लोमड़ी की मीठी बातें सुनकर बकरी का मन ललचा गया। वह उसके साथ जाने ही वाली थी कि तभी उसे अपनी माँ की चेतावनी याद आ गई। उसे समझ आ गया कि लोमड़ी उसे धोखा दे रही है।
वह तुरंत वहाँ से भागी और दौड़कर अपनी माँ के पास पहुँच गई। उसने अपनी माँ को पूरी बात बताई। माँ ने उसे गले लगाकर कहा, "तुमने बहुत अच्छा किया! वह लोमड़ी तुम्हें नुकसान पहुँचाना चाहती थी। मेरी बात मानकर तुमने अपनी जान बचा ली।" उस दिन के बाद से, वह नन्ही बकरी हमेशा अपने परिवार के साथ ही रहती थी।
Moral
अजनबियों की मीठी बातों में आकर धोखा नहीं खाना चाहिए।