एक घने जंगल के पास एक सुंदर फार्म था, जहाँ बहुत सारे रंग-बिरंगे मुर्गें और मुर्गियाँ रहते थे। जंगल के करीब होने के कारण, लोमड़ियाँ और अन्य जंगली जानवर अक्सर मुर्गों पर हमला करने की कोशिश करते थे। इससे बचाने के लिए, किसान ने बाड़ के पास कुछ जाल बिछा रखे थे।
एक सुबह, 'मणि' नाम का एक मुर्गा दाना चुगने के लिए बगीचे में गया। वहाँ उसने देखा कि बाड़ के पास एक बड़ा जाल लगा है और उसमें एक लोमड़ी फंसी हुई है। लोमड़ी ने बहुत ही मासूम चेहरा बनाया और मणि से बात करने लगी।
'प्यारे मुर्गे भाई!' लोमड़ी ने मिन्नत करते हुए कहा, 'मैं तो बस अपने दोस्त से मिलने जा रही थी कि अचानक इस जाल में फंस गई। अगर तुम मुझे आज़ाद कर दोगे, तो मैं तुम्हारी जीवन भर ऋणी रहूँगी और हम अच्छे दोस्त बन जाएंगे!'
लेकिन मणि बहुत समझदार था। उसने लोमड़ी की आँखों में लालच देखा और समझ गया कि वह दोस्ती नहीं, बल्कि उसे अपना भोजन बनाना चाहती है। मणि ने सोचा कि अगर उसने लोमड़ी की मदद की, तो वह दोबारा आकर पूरे झुंड को नुकसान पहुँचाएगी।
मणि जाल के पास जाने के बजाय, वहीं खड़ा होकर ज़ोर-ज़ोर से बांग देने लगा। 'कुक्ड़ूँ-कूँ!' उसकी आवाज़ सुनकर किसान दौड़ता हुआ आया। लोमड़ी को जाल में देखकर किसान समझ गया कि यह खतरा है, और उसने तुरंत लोमड़ी को काबू में कर लिया। मणि की चतुराई से फार्म के सभी पक्षी सुरक्षित बच गए।
Moral
दुष्टों की मीठी बातों में आकर कभी धोखा नहीं खाना चाहिए।