एक समृद्ध नगर में साइलस नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके पास सोने और रत्नों का विशाल भंडार था। लेकिन उसकी दौलत ही उसकी सबसे बड़ी चिंता बन गई थी। उसे हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं कोई उसका धन न चुरा ले, इस डर के कारण उसे रात भर नींद नहीं आती थी।
एक बार यात्रा के दौरान, उसकी मुलाकात लियो नाम के एक युवक से हुई। लियो एक चतुर चोर था जिसकी नज़र साइलस की कमर पर बँधे कीमती थैले पर थी। लियो ने एक योजना बनाई और साइलस के पास जाकर विनम्रता से कहा, "सेठ जी, मैंने संसार की मोह-माया छोड़ दी है। मैं एक सादा जीवन जीना चाहता हूँ। क्या आप मुझे अपना सहायक बना लेंगे?"
साइलस को लगा कि जो व्यक्ति धन का लालची नहीं है, वह उसके धन की रक्षा भी अच्छे से कर पाएगा। उसने लियो को स्वीकार कर लिया।
कुछ दिनों बाद, साइलस ने देखा कि लियो बहुत ही गहरी और शांतिपूर्ण नींद सोता है। एक शाम साइलस ने पूछा, "लियो, तुम इतनी शांति से कैसे सो लेते हो? मैं तो डर के मारे पूरी रात जागता रहता हूँ।"
लियो ने मुस्कुराते हुए कहा, "सेठ जी, इसके लिए एक विशेष विधि है। आपको वह चीज़ इस पुराने पेड़ के नीचे रखनी होगी जिसे आप सबसे अधिक प्रिय मानते हैं, और फिर पांच बार पेड़ के चक्कर लगाने होंगे।"
साइलस ने अपने सोने का थैला लिया और लियो के साथ जंगल में उस पेड़ के पास पहुँचा। उसने थैला ज़मीन पर रखा और मंत्रमुग्ध होकर पेड़ के चारों ओर घूमने लगा। जब वह घूमकर वापस आया, तो थैला गायब था और लियो भी जा चुका था।
साइलस घबराकर चिल्लाया, "लियो! मेरा धन कहाँ गया?"
तभी झाड़ियों के पीछे से लियो की आवाज़ आई, "सेठ जी, आप इसलिए नहीं सो पाते थे क्योंकि आपका मन उस धन में अटका हुआ था। अब जब वह चला गया है, तो देखिए आपका मन कितना हल्का महसूस कर रहा है! असली शांति वस्तुओं में नहीं, मन के संतोष में है।"
साइलस को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ आया कि धन की रक्षा की चिंता ने उसकी शांति छीन ली थी। उस रात, साइलस को वर्षों बाद बहुत सुकून की नींद आई।
Moral
लालच मानसिक अशांति लाता है, जबकि संतोष शांति प्रदान करता है।