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Panchatantra Tale

सलाह का जाल

The Trap of Opinions

एक छोटे से गाँव में रवि नाम का एक किसान रहता था। उस साल फसल खराब होने के कारण वह बहुत गरीबी में आ गया था। अपने परिवार का पेट पालने के लिए, उसने अपनी एकमात्र बकरी को बाज़ार में बेचने का फैसला किया।

5–12 yr 2 min medium
बिना सोचे-समझे दूसरों की हर बात मानने से नुकसान ही होता है।
सलाह का जाल — NilaTales cover art
5–12 yr 2 min medium
PANCHANTANTRA · labdhapranasam

Frame tale: பெற்றதை இழத்தல் (Loss of Gains)

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एक छोटे से गाँव में रवि नाम का एक किसान रहता था। उस साल फसल खराब होने के कारण वह बहुत गरीबी में आ गया था। अपने परिवार का पेट पालने के लिए, उसने अपनी एकमात्र बकरी को बाज़ार में बेचने का फैसला किया।

रवि और उसका छोटा बेटा, अर्जुन, बकरी लेकर बाज़ार की ओर चल दिए। रास्ते में एक यात्री ने उन्हें देखा और कहा, "तुम दोनों पैदल क्यों चल रहे हो? बकरी काफी मजबूत है। बच्चे को बकरी पर बैठा दो और तुम उसके साथ पैदल चलो।"

रवि को यह बात सही लगी। उसने अर्जुन को बकरी पर बैठा दिया और खुद पैदल चलने लगा। कुछ दूर आगे बढ़ने पर, गाँव वालों ने उन्हें देखा और ताना मारा, "देखो, बच्चा आराम से बैठा है और बूढ़ा पिता पैदल चल रहा है! यह कितना गलत है!"

शर्मिंदा होकर रवि ने अर्जुन को नीचे उतारा और खुद बकरी पर बैठ गया। तभी एक बूढ़ी औरत ने उन्हें रोका और डाँटा, "तुम बड़े होकर भी क्या कर रहे हो? बच्चे को पैदल चला रहे हो और तुम बकरी पर बैठे हो!"

अब रवि और अर्जुन दोनों बकरी पर बैठ गए। तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति वहाँ से गुजरे और दुखी होकर बोले, "दुनिया बदल गई है! दो लोग बकरी पर बैठे हैं और बच्चा पैदल चल रहा है। क्या तुम्हें दया नहीं आती?"

अब रवि पूरी तरह उलझन में था। उसने सोचा कि अगर वे सवारी नहीं करेंगे, तो बकरी को उठा लेंगे। उन्होंने एक लंबा डंडा लिया और बकरी को उसके नीचे रखकर उल्टा उठाने की कोशिश की। जब वे एक छोटी सी नदी पार कर रहे थे, तो पानी की आवाज़ सुनकर बकरी डर गई और अचानक उछल पड़ी। डंडा अर्जुन के हाथ से छूट गया और बकरी नदी के तेज़ बहाव में बह गई। दूसरों की बातों में आकर अपनी बुद्धि का इस्तेमाल न करने के कारण, रवि ने अपनी एकमात्र संपत्ति खो दी।

The Lesson

बिना सोचे-समझे दूसरों की हर बात मानने से नुकसान ही होता है।

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