एक विशाल जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था, जिसे सभी जानवर उसकी न्यायप्रियता के लिए सम्मान देते थे। एक दोपहर, जब शेर एक बड़े पेड़ की छाया में आराम कर रहा था, उसे झाड़ियों में हलचल सुनाई दी।
एक भूखा भेड़िया एक छोटे से मेमने को अपने मुँह में दबाकर तेजी से भाग रहा था। मेमना डर के मारे चिल्ला रहा था। भेड़िया उसे अपना शिकार बनाना चाहता था।
शेर ने तुरंत कार्रवाई की। एक ज़ोरदार दहाड़ के साथ, शेर भेड़िए के सामने आ गया। शेर ने अपनी शक्ति से भेड़िए को पीछे धकेल दिया और मेमने को सुरक्षित बचा लिया। मेमना डरते हुए शेर के पास खड़ा हो गया।
भेड़िया गुस्से में लाल हो गया और शेर पर चिल्लाया, "तुमने मेरा भोजन क्यों चुराया? यह मेरा शिकार है!"
शेर ने शांति से पूछा, "भेड़िए, क्या यह मेमना तुम्हारा है? क्या तुमने इसे पाला है, या किसी चरवाहे ने इसे तुम्हें दिया है?"
भेड़िया निरुत्तर हो गया। उसे पता था कि उसने चोरी की है। शर्मिंदगी और गुस्से में, वह वहां से भाग गया। शेर ने मेमने को सुरक्षित चरवाहे के पास पहुँचा दिया। जंगल के जानवरों ने सीखा कि गलत तरीके से हासिल की गई चीज़ कभी सुख नहीं देती।
Moral
गलत तरीके से मिली सफलता कभी टिकती नहीं है।