कड़कती धूप वाले एक दोपहर में, सोमू नाम का एक व्यापारी एक सूखे और रेतीले रास्ते से गुजर रहा था। वहाँ दूर-दूर तक कोई पेड़ नहीं था और सूरज आग उगल रहा था। काफी देर तक चलने के कारण सोमू बहुत थक गया था और उसे प्यास भी लगी थी।
तभी उसने एक किसान को बैल के साथ देखा और यात्रा पूरी करने के लिए बैल को किराए पर ले लिया। किसान भी सोमू के साथ-साथ चलने लगा। जब दोपहर की तपिश बहुत बढ़ गई, तो सोमू ने बैल से बनने वाली एक छोटी सी परछाई देखी और राहत पाने के लिए उसके नीचे बैठ गया।
किसान भी धूप में चलते-चलते बहुत थक चुका था। वह भी उसी परछाई में बैठना चाहता था। लेकिन सोमू ने उसे रोक दिया। सोमू चिल्लाकर बोला, "मैंने बैल को यात्रा के लिए किराए पर लिया है, उसकी परछाई के लिए नहीं!"
किसान को गुस्सा आ गया। वह चिल्लाया, "तुमने बैल की ताकत किराए पर ली है, उसकी छाया नहीं! हट जाओ यहाँ से!" दोनों के बीच ज़ोरदार बहस होने लगी। शोर सुनकर बैल डर गया और वहाँ से भाग खड़ा हुआ। अंत में, झगड़ने वाले दोनों ही व्यक्तियों को न तो बैल मिला और न ही वह परछाई। उन्हें तपती धूप में ही खड़ा रहना पड़ा।
Moral
छोटी चीज़ों के लिए लड़ने से अक्सर हाथ में आया हुआ भी चला जाता है।