घने जंगल में एक बहुत बड़ा उत्सव चल रहा था। जंगल के राजा शेर का जन्मदिन था। सभी जानवर शेर की गुफा के सामने इकट्ठा हुए थे और स्वादिष्ट फल व मेवे खाकर आनंद ले रहे थे।
तभी, एक नन्हा बंदर पेड़ की टहनी पर चढ़कर बहुत ही सुंदर नृत्य करने लगा। उसकी फुर्ती देखकर सभी जानवर तालियाँ बजाने लगे और बहुत खुश हुए।
लेकिन, वहीं खड़े एक विशाल हाथी को उस बंदर को देखकर बहुत जलन हुई। उसने सोचा, 'सब उस छोटे से बंदर को क्यों देख रहे हैं? अगर मैं नाचूँगा, तो सब मुझे देखकर हैरान रह जाएंगे!'
हाथी ने तुरंत अपने भारी पैरों से नाचना शुरू कर दिया। लेकिन उसका नाच बहुत ही अजीब और असंतुलित था। शेर ने प्यार से कहा, 'मित्र, अब बस करो, अब हमें शांति से बैठना चाहिए।'
परंतु, हाथी को तो बस तारीफ चाहिए थी। उसने शेर की बात अनसुनी कर दी और और भी ज़ोर-ज़ोर से थिरकने लगा। नाचते समय वह अनजाने में दूसरे जानवरों से टकराने लगा और छोटे जानवरों को डराने लगा। अंत में, अपने ही भारी शरीर के कारण हाथी लड़खड़ाकर कीचड़ में गिर पड़ा।
जब उत्सव समाप्त हुआ, तो हाथी को अहसास हुआ कि उसके ईर्ष्या और घमंड ने उसे सबका प्रिय बनाने के बजाय सबका तिरस्कार दिला दिया है।
Moral
ईर्ष्या और अहंकार हमेशा अपमान का कारण बनते हैं।