नीलगिरी के घने जंगलों में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसे इंसानों ने नहीं, बल्कि जंगल के जानवरों ने पाला था। सालों पहले, कविन ने आग से एक नन्हे काले तेंदुए को बचाया था, जिसके बदले में उसकी माँ 'साया' ने कविन को अपने बच्चे की तरह पाल लिया।
कविन के गुरु 'कम्बन' नाम का एक विशाल भालू था। कम्बन ने कविन को पेड़ों पर चढ़ना, नदियों में तैरना और तेज़ी से दौड़ना सिखाया। कविन अब जंगल का ही एक हिस्सा बन चुका था।
एक दिन, जब कविन और कम्बन नदी के किनारे मछली पकड़ रहे थे, तभी झाड़ियों से एक भयानक दहाड़ सुनाई दी। वह 'खूंखार' नाम का एक जंगली बाघ था! कविन उसे देखकर डर गया, क्योंकि उसे याद आया कि इसी बाघ ने सालों पहले उसके गाँव में आग लगाई थी और उसके परिवार से उसे अलग कर दिया था।
साया ने तुरंत आकर कविन की रक्षा की। जानवरों ने तय किया कि कविन को अब इंसानों की बस्ती में भेज देना चाहिए। लेकिन इंसानों ने अपने गाँव के चारों ओर ऊँची बाड़ लगा रखी थी। रास्ता केवल उसी पहाड़ी से होकर गुजरता था जहाँ वह बाघ रहता था।
रास्ते में बाघ ने फिर से उनका रास्ता रोका। तभी साया ने जंगली भैंसों के झुंड को बाघ की तरफ दौड़ा दिया। भगदड़ में बाघ एक संकरी चट्टान की दरार में फंस गया। कविन ने हिम्मत दिखाई और एक भारी लकड़ी का लट्ठा उस दरार के पास गिरा दिया ताकि बाघ बाहर न निकल सके। बाघ वहीं फंस कर रह गया। कविन अपने पशु मित्रों के साथ जंगल में सुरक्षित रहने लगा।
Moral
साहस और सूझबूझ से बड़ी से बड़ी मुसीबत को टाला जा सकता है।