एक छोटे से गाँव में सोमू नाम का एक गरीब किसान अपनी पत्नी नीला के साथ रहता था। वे बहुत मेहनती थे, लेकिन उनके पास बहुत कम साधन थे। एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, उनके घर के दरवाजे पर तीन बुजुर्ग यात्री आए। उनके चेहरों पर एक अजीब सी शांति थी।
नीला ने उत्सुकता से पूछा, "महाराज, आप कौन हैं और हमारे घर क्यों आए हैं?" यात्रियों ने मुस्कुराते हुए कहा, "हम जीवन के तीन रास्ते हैं। हमारे नाम दया, धन और सफलता हैं। आप हम में से किसी एक को ही अपने घर में आमंत्रित कर सकते हैं।"
नीला दौड़कर सोमू के पास गई। सोमू ने सोचा और कहा, "अगर हम धन को बुलाएँगे, तो हमारे पास खाने और रहने की कोई कमी नहीं होगी।"
नीला ने सिर हिलाते हुए कहा, "नहीं सोमू, अगर हमारे पास धन होगा, तो हम उससे सफलता भी खरीद सकते हैं। इसलिए हमें सफलता को बुलाना चाहिए।"
तभी उनकी छोटी बेटी कविता वहाँ आई। वह बहुत ही दयालु स्वभाव की थी और गाँव के सभी जानवरों और लोगों की मदद करती थी। यात्रियों ने कविता की मासूमियत देखी। सोमू और नीला ने निर्णय लिया, "हम अपने घर में दया का स्वागत करते हैं।"
जैसे ही 'दया' नाम के यात्री ने घर के अंदर कदम रखा, एक चमत्कार हुआ। धन और सफलता, जो बाहर खड़े थे, अपने आप कविता के पीछे घर के अंदर आ गए। पूरा परिवार यह देखकर दंग रह गया। दया ने धीरे से कहा, "यदि आपने केवल धन या सफलता को बुलाया होता, तो वे दोनों बाहर ही खड़े रहते। लेकिन क्योंकि आपने दया को चुना, इसलिए जहाँ दया है, वहाँ धन और सफलता अपने आप आ जाते हैं।"
Moral
दया ही धन और सफलता का असली आधार है।