एक सुंदर घाटी में ग्रीनलीफ और स्टोनहिल नाम के दो गाँव थे। उनके बीच एक बड़ी नदी बहती थी, जिससे लोगों का एक गाँव से दूसरे गाँव जाना बहुत मुश्किल था। यह देखकर, एक दयालु राजा ने दोनों गाँवों को जोड़ने के लिए एक मज़बूत पत्थर का पुल बनवाया।
शुरुआत में सब खुश थे, लेकिन जल्द ही झगड़ा शुरू हो गया। ग्रीनलीफ के लोगों ने कहा, "यह पुल हमारे गाँव से शुरू होता है, इसलिए यह हमारा है!" स्टोनहिल के लोगों ने तर्क किया, "नहीं, यह रास्ता हमारे गाँव की ओर जाता है, इसलिए यह हमारा है!" दोनों गाँव आपस में लड़ने लगे।
राजा ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में, राजा ने अपने बुद्धिमान सलाहकार, कवि को बुलाया। कवि ने दोनों गाँवों के लोगों को नदी के किनारे बुलाया और उनकी बात सुनी।
कवि ने शांति से कहा, "मेरे पास एक समाधान है। यदि आप इस पुल के मालिक बनना चाहते हैं, तो आपको एक नियम मानना होगा। जिस गाँव का पुल होगा, उस गाँव के लोग केवल अपने गाँव में आने के लिए पुल का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन वे दूसरे गाँव जाने के लिए इसका उपयोग नहीं कर सकते।"
गाँव वाले सोचने लगे। उन्होंने महसूस किया कि यदि वे पुल को केवल अपने लिए रखेंगे, तो वे दूसरे गाँव जाकर ज़रूरी सामान जैसे नमक या कपड़े नहीं ला पाएंगे। वे खुद को एक घेरे में बंद कर लेंगे। उन्हें समझ आ गया कि पुल जोड़ने के लिए होता है, तोड़ने के लिए नहीं।
अपनी गलती समझते ही, लोगों का गुस्सा शांत हो गया। उन्होंने तय किया कि पुल सबका है और सब इसका उपयोग करेंगे। घाटी में फिर से खुशहाली लौट आई।
Moral
मिलकर रहने और बाँटने में ही सबका भला है।