एक शांत गाँव में कविन और मगिल नाम के दो मित्र रहते थे। वे हमेशा साथ रहते थे, लेकिन छोटी-छोटी बातों पर बहस करना उनकी आदत थी। एक शाम, नदी के किनारे बैठे हुए उनके बीच एक गंभीर चर्चा छिड़ गई।
"मगिल, मैं ईश्वर में विश्वास नहीं करता। यह सब बस एक कहानी है!" कविन ने अचानक कहा।
मगिल ने हैरानी से उसकी ओर देखा। "तुम ऐसा कैसे कह सकते हो कविन? अगर ईश्वर नहीं है, तो यह दुनिया कैसे चलती है?"
कविन ने गुस्से में कहा, "आस-पास देखो! कितने लोग भूखे हैं और कितने लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं। अगर ईश्वर होता, तो वह दुनिया में इतना दुख और कष्ट क्यों होने देता?"
मगिल शांत रहा। तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति उनके पास से गुजरे। उनके बाल पूरी तरह सफेद थे। मगिल ने कविन की ओर देखा और धीरे से कहा, "कविन, उस बुजुर्ग के बालों को देखो। उनका सफेद बाल उनके लंबे जीवन और उनके अनुभवों की कहानी कहता है।"
कविन उलझन में पड़ गया। मगिल ने आगे कहा, "ईश्वर कोई जादूगर नहीं है जो आसमान से उतरे और अपनी छड़ी घुमाकर सारी परेशानियाँ दूर कर दे। बल्कि, ईश्वर वह शक्ति है जो हमें मुश्किल समय में धैर्य देती है, और वह करुणा है जो हमें दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करती है। जब हम किसी अजनबी की आँखों में दया देखते हैं, वही ईश्वर है।"
कविन चुपचाप सोचने लगा। उसने उन डॉक्टरों के बारे में सोचा जो बीमारों की सेवा करते हैं और उन लोगों के बारे में जो भूखों को खाना खिलाते हैं। उसे समझ आया कि ईश्वर कोई मूर्ति या चेहरा नहीं, बल्कि इंसान के अच्छे कर्मों और दयालुता में बसता है। उसका गुस्सा शांत हो गया और मन को शांति मिली।
Moral
मानवता और दयालुता ही ईश्वर का सच्चा रूप है।