बहुत समय पहले, आर्यन नाम का एक दयालु राजकुमार रहता था। उसके पास एक जादुई नीला पत्थर था। उस पत्थर को छूते ही लोगों के लिए भोजन, कपड़े और दवाइयाँ अपने आप बन जाती थीं। आर्यन उस पत्थर की मदद से अपनी प्रजा की सेवा करता था। लेकिन एक दिन वह जादुई पत्थर कहीं खो गया।
आर्यन बहुत दुखी हुआ और उसे ढूँढने के लिए घने जंगल में चला गया। वहाँ एक बूढ़े उल्लू ने उसे देखा और पूछा, "राजकुमार, आप इतने उदास क्यों हैं?"
आर्यन ने लंबी आह भरते हुए कहा, "मेरा जादुई पत्थर खो गया है। उसके बिना मैं अपनी प्रजा की मदद नहीं कर पाऊँगा। उन्हें खाना और दवाइयाँ नहीं मिल पाएँगी।"
उल्लू मुस्कुराया और बोला, "राजकुमार, क्या मदद करने के लिए पत्थर की ज़रूरत है? क्या आपके पास अपने हाथ, अपना दिमाग और अपना प्यार नहीं है?"
आर्यन को बात समझ आ गई। उसे एहसास हुआ कि वह पत्थर के बजाय अपनी काबिलियत पर भरोसा कर सकता है। उसने तय किया कि वह बिना जादू के भी लोगों की सेवा करेगा।
उस दिन से आर्यन बदल गया। वह महल छोड़कर लोगों के बीच रहने लगा। एक बार जंगल में उसने एक घायल हिरण के बच्चे को देखा। जादू करने के बजाय, उसने अपने हाथों से उसके घाव साफ किए और जड़ी-बूटियों से उसका इलाज किया। उसने बुजुर्गों का बोझ उठाया और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। उसके हर काम में जादू से ज्यादा प्रेम था।
कुछ हफ़्तों बाद, महल के बगीचे के एक तालाब में उसे कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। वह वही नीला पत्थर था! जैसे ही आर्यन ने उसे उठाया, पत्थर बोलने लगा, "आर्यन, तुमने असली परीक्षा पास कर ली है। तुमने साबित कर दिया कि सच्ची दया पत्थर में नहीं, बल्कि तुम्हारे दिल में है। अब तुम्हारी अच्छाई की वजह से इस पत्थर की शक्ति और बढ़ गई है।"
उस जादुई शक्ति और अपने नेक दिल के साथ, आर्यन एक महान राजा बना।
Moral
मदद करने के लिए जादू की नहीं, बल्कि सच्चे दिल और प्रयासों की ज़रूरत होती है।