एक बहुत सुंदर राज्य में राजकुमारी माया रहती थी। माया दिखने में बहुत सुंदर थी, लेकिन उसका स्वभाव बहुत ही गुस्सैल था। छोटी-छोटी बातों पर वह अपना आपा खो देती थी। उसके हमेशा गुस्से में रहने के कारण महल के लोग उससे बात करने से भी डरते थे।
एक दिन, एक छोटी सी गलती पर अपनी दासी पर चिल्लाने के बाद, माया गुस्से में बगीचे में टहलने निकल गई। वहाँ उसने एक चमकता हुआ सुनहरा लिली का फूल देखा। उस फूल की सुंदरता देखकर माया को जलन हुई और उसने उसे तोड़ने के लिए हाथ बढ़ाया।
तभी एक चमत्कार हुआ! फूल बोलने लगा, "राजकुमारी, कृपया मुझे न तोड़ें। असली सुंदरता फूलों की पंखुड़ियों में नहीं, बल्कि मन की शांति में होती है। यदि आप अपने हृदय में दया और प्रेम जगा लें, तो आप इस फूल से भी कहीं अधिक सुंदर दिखेंगी।"
माया हैरान रह गई। फूल ने एक चुनौती दी, "एक सप्ताह तक, आप बिना गुस्सा किए और हर किसी से मुस्कुराकर बात करने का प्रयास करें। यदि आपका स्वभाव बदलता है, तो आपका चेहरा भी बदल जाएगा।"
ya ने यह चुनौती स्वीकार कर ली। अगले दिन, जब रसोइए ने उसे उसकी पसंदीदा मिठाई के बजाय स्वास्थ्यवर्धक भोजन दिया, तो माया चिल्लाई नहीं। इसके बजाय, उसने मुस्कुराकर कहा, "धन्यवाद, यह मेरे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।" रसोइया उसकी इस विनम्रता को देखकर बहुत खुश हुआ।
धीरे-धीरे, माया का व्यवहार बदलने लगा। वह पशु-पक्षियों और नौकरों के साथ बहुत प्यार से रहने लगी। जैसे-जैसे उसका मन शांत हुआ, उसके चेहरे का तनाव दूर हो गया और एक नई चमक आने लगी।
एक दिन, एक गिलहरी ने उससे पूछा, "राजकुमारी, आपके चेहरे पर इतना तेज क्यों है?"
पास के एक पुराने पेड़ ने कहा, "नन्ही गिलहरी, क्योंकि उसका मन शुद्ध हो गया है। जब इंसान का चरित्र सुंदर होता है, तो उसका चेहरा अपने आप चमकने लगता है।"
माया ने उस फूल को धन्यवाद दिया। उसकी दयालुता के कारण, उसके चेहरे के चारों ओर एक दिव्य आभा दिखाई देने लगी। अब वह केवल रूप से ही नहीं, बल्कि अपने गुणों से भी राज्य की सबसे प्रिय राजकुमारी बन गई थी।
कहानी की सीख
सच्चा सौंदर्य चेहरे में नहीं, बल्कि हमारे अच्छे व्यवहार और मन में होता है।