अर्जुन और विवेक एक शाम कॉलेज से घर लौट रहे थे। अचानक मौसम बदल गया और ज़ोरदार बारिश होने लगी। दोनों पूरी तरह भीग गए। जब बारिश थोड़ी कम हुई, तो उन्होंने घर जाने के लिए एक ऑटो लिया।
ऑटो ड्राइवर मुनुसामी बहुत ही शांत स्वभाव के थे। रास्ते में अर्जुन ने कहा, 'भैया, पास में एक ढाबा है, क्या हम वहाँ रुक सकते हैं? हमें भूख लगी है।' लेकिन मुनुसामी ने मना कर दिया, 'नहीं बेटा, हमें कहीं नहीं रुकना है, सीधे चलते हैं।'
जब वे घर पहुँचे, तो विवेक ने उत्सुकता से पूछा, 'साहब, हमने खाने के लिए कहा फिर भी आपने कुछ क्यों नहीं लिया?'
मुनुसामी ने धीमी आवाज़ में कहा, 'आज सुबह मेरे छोटे भाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी दवाइयों के लिए पैसे जुटाने के लिए मैं सुबह से काम कर रहा हूँ। आपकी कमाई का एक-एक पैसा उसके काम आएगा। ऐसी ज़रूरत के समय में फालतू खर्च करना मुझे ठीक नहीं लगा।'
उनकी ईमानदारी देखकर अर्जुन और विवेक भावुक हो गए। उन्होंने कहा, 'साहब, आपकी मेहनत और सच्चाई को हमारा सलाम। आप इस सवारी के पैसे रख लीजिए और यह कुछ पैसे अपने भाई की मदद के लिए रख लीजिए।' मुनुसामी ने उनकी दयालुता को स्वीकार किया और मुस्कुरा दिए।
Moral
ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ही मनुष्य की असली पहचान है।