एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक लकड़हारा रहता था। उसका एक बेटा था जिसका नाम कदिर था। कदिर स्वभाव से अच्छा था, लेकिन उसमें एक बड़ी कमी थी: वह बिना सोचे-समझे बहुत जल्दबाजी में काम करता था। उसके पिता ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन कदिर पर कोई असर नहीं हुआ।
जब सोमू बूढ़ा होने लगा, तो उसने तय किया कि अब कदिर को काम सिखाना चाहिए। "कदिर, आज तुम्हें जंगल जाकर लकड़ियाँ लानी हैं। लेकिन याद रखना, जब तक तुम्हें सही से पता न चल जाए कि क्या करना है, तब तक कोई काम शुरू मत करना," सोमू ने चेतावनी दी।
कदिर उलझन में था। "पिताजी, मुझे लकड़ी काटना तो आता है, लेकिन यह नहीं पता कि कौन सा पेड़ काटना चाहिए," उसने कहा।
सोमू ने उसे सलाह दी। "जंगल जाओ और अनुभवी लकड़हारों को देखो कि वे कैसे काम करते हैं। वे कौन सा पेड़ चुनते हैं और उसे गाड़ी में कैसे लादते हैं, बस वैसा ही करना।"
कदिर जंगल पहुँचा। उसने देखा कि अन्य लोग पेड़ काटते हैं, फिर सावधानी से उसे ज़मीन पर गिराते हैं और उसके बाद ही गाड़ी में लादते हैं। कदिर ने सोचा, "ये लोग इतने धीरे काम क्यों कर रहे हैं? कितना समय बर्बाद कर रहे हैं!"
सबसे तेज़ काम करने के चक्कर में, कदिर ने एक बड़ा पेड़ देखा। समय बचाने के लिए, उसने अपनी गाड़ी को पेड़ के बिल्कुल नीचे खड़ा कर दिया। उसने यह भी नहीं देखा कि पेड़ किस दिशा में गिरेगा और बस काटने लगा।
धड़ाम! पेड़ काटते ही सीधा गाड़ी पर जा गिरा। गाड़ी बुरी तरह टूट गई। कदिर हैरान रह गया। लेकिन उसकी नासमझी अभी खत्म नहीं हुई थी। उसने सोचा, "यह गाड़ी बहुत ही बेकार है, एक पेड़ का भार भी नहीं सह सकी!"
वह बड़बड़ाते हुए घर वापस आ गया। जब सोमू को यह सब पता चला, तो वह बहुत दुखी हुआ। उसे समझ आ गया कि बिना ध्यान और धैर्य के किया गया काम केवल नुकसान ही पहुँचाता है। कदिर को अभी तक अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ था।
Moral
काम करने से पहले सावधानी से देखना और धैर्य रखना बहुत ज़रूरी है।