सृष्टि के आरंभ में, ईश्वर हर जीव को विशेष गुण और रंग देकर पृथ्वी पर भेजने की तैयारी कर रहे थे। वे एक सुनहरी डायरी में हर जानवर की खूबियों को लिखते थे।
सबसे पहले शेर आया। ईश्वर ने कहा, "मैं तुम्हें अपार शक्ति देता हूँ। इसका उपयोग केवल अपनी रक्षा और भोजन के लिए करना, दूसरों को डराने के लिए नहीं।" शेर ने सम्मान के साथ सिर झुकाया और चला गया।
पास ही एक साधारण भूरे रंग का गिरगिट छिपा बैठा था। शेर को जाते देख गिरगिट उसके पास गया और बोला, "हे महाराज! आपकी सुनहरी अयाल कितनी शानदार है! आप तो ईश्वर की सबसे सुंदर रचना हैं!" शेर अपनी झूठी प्रशंसा सुनकर गर्व से फूल गया और चला गया।
इसके बाद बाघ आया। जब ईश्वर बाघ की सुंदरता के बारे में लिख रहे थे, गिरगिट फिर से आ धमका। "बाघ भाई! आपकी यह नारंगी रंगत तो सूरज की तरह चमक रही है! आप सबसे अद्भुत हैं!" बाघ भी खुश होकर मुस्कुरा दिया।
yaise ही गिरगिट हर जानवर के पास जाकर उनकी झूठी तारीफ करता ताकि वह ईश्वर की डायरी के रहस्य जान सके। ईश्वर यह सब देख रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि गिरगिट प्यार के लिए नहीं, बल्कि चालाकी से दूसरों को अपने वश में करने के लिए ऐसा कर रहा है।
एक रात, जब ईश्वर विश्राम कर रहे थे, गिरगिट उनकी डायरी पर चढ़ गया। उसने आसमान में इंद्रधनुष देखा और लालच में आकर चिल्लाने लगा, "मुझे लाल रंग चाहिए! मुझे हरा रंग चाहिए! मुझे सब रंग चाहिए!"
अगले दिन जब ईश्वर जागे, तो उन्होंने गिरगिट का लालच और उसकी चालाकी देख ली। उन्होंने कहा, "तुम्हें एक शक्ति मिलेगी—तुम किसी भी रंग में बदल सकोगे। लेकिन याद रखना, यह वरदान नहीं, एक चेतावनी है। जो लोग दूसरों को अपनी मीठी बातों से धोखा देते हैं, दुनिया उन्हें 'गिरगिट' के नाम से जानेगी।"
तभी से, जो लोग रंग बदलते हैं या अपनी बातों से दूसरों को ठगते हैं, उन्हें 'गिरगिट' कहा जाने लगा।
Moral
झूठी प्रशंसा से आप लोगों को कुछ समय के लिए प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन सच्चाई ही सम्मान दिलाती है।