नीले पहाड़ों के घने जंगल में सभी जानवर शांति से रहते थे। लेकिन ब्रूनो नाम का एक विशाल भालू था, जिसे दूसरों को डराकर अपनी ताकत दिखाने में मज़ा आता था। जब भी कोई छोटा जानवर उसके पास आता, वह जोर से दहाड़कर उन्हें डरा देता था।
एक दिन, ब्रूनो ने एक ऊंचे पेड़ पर एक बड़ा मधुमक्खी का छत्ता देखा। वह तुरंत पेड़ पर चढ़ा और छत्ते को जोर से तोड़ दिया, जिससे सारा शहद नीचे गिर गया। ब्रूनो ने सारा शहद चट कर लिया। मधुमक्खियों ने दुखी होकर कहा, "हमने इतनी मेहनत से यह घर बनाया है, आप इसे क्यों नष्ट कर रहे हैं?" लेकिन ब्रूनो ने उनकी बात अनसुनी कर दी और उन्हें भगा दिया। मधुमक्खियों ने फिर से मेहनत की और एक नया छत्ता बनाया, पर ब्रूनो ने उसे भी तोड़ दिया। अंत में, मधुमक्खियां जंगल के सबसे ऊंचे पेड़ पर चली गईं।
कुछ हफ़्तों बाद, जंगल में शिकारियों के कुत्तों का एक झुंड आ गया। ब्रूनो ने उनका सामना करने की कोशिश की, लेकिन कुत्तों की संख्या बहुत ज़्यादा थी। उन्होंने ब्रूनो को चारों तरफ से घेर लिया और उसे काटने लगे। घायल और दर्द से कराहते हुए, ब्रूनो अपनी गुफा के पास आकर बैठ गया। उसके घावों से खून बह रहा था और वह बहुत दर्द में था।
मधुमक्खियों की रानी ने यह सब देखा। उसे ब्रूनो पर दया आ गई। वह उड़कर आई और उसके घावों पर शहद की एक बूंद डाली। शहद की ठंडक से ब्रूनो को तुरंत राहत मिली। अगले कुछ दिनों तक, मधुमक्खियां आती रहीं और उसके घावों पर शहद लगाकर मरहम की तरह काम करती रहीं। शहद के औषधीय गुणों से ब्रूनो के घाव जल्दी भर गए।
ब्रूनो को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने सोचा कि जिस मधुमक्खी को उसने इतना परेशान किया, उसी ने आज उसकी जान बचाई है। उसने अपनी गलती स्वीकार की और उस दिन से वह जंगल का सबसे अच्छा रक्षक बन गया।
Moral
दयालुता से हम दुश्मनों का दिल भी जीत सकते हैं।