पहाड़ों के बीच बसे एक सुंदर राज्य में राजकुमारी माया रहती थी। माया का दिल बहुत कोमल था और उसे पशु-पक्षियों से बहुत लगाव था। वह जंगल के हर जीव को अपना मित्र मानती थी।
एक दिन महल के बगीचे में टहलते समय, माया को एक छोटा सा पक्षी ज़मीन पर गिरा हुआ मिला। उसके पंख में चोट लगी थी। माया को बहुत दुख हुआ। उसने बड़ी कोमलता से उस पक्षी को अपने हाथों में उठाया और महल के वैद्यों के पास ले गई। कई दिनों की सेवा और जड़ी-बूटियों के उपचार के बाद, पक्षी ठीक तो हो गया, लेकिन वह उड़ने में असमर्थ था।
कुछ हफ़्तों बाद, माया उस पक्षी को महल की छत पर ले गई और धीरे से कहा, "अब तुम उड़ सकते हो, डरो मत।" पक्षी ने धीरे-धीरे अपने पंख फड़फड़ाए और नीले आसमान में उड़ गया।
तभी, अचानक एक दिव्य रोशनी चमकी और एक परी प्रकट हुई। परी ने कहा, "माया, तुम्हारी निस्वार्थ सेवा ने मेरा दिल जीत लिया है। मांगो, तुम्हें क्या वरदान चाहिए?" माया ने अपने लिए सोना या धन नहीं मांगा। उसने कहा, "परी माँ, मैं इस दुनिया के सभी घायल पशुओं और पक्षियों की मदद करना चाहती हूँ। मुझे पता चले कि वे कहाँ हैं ताकि मैं उनकी सेवा कर सकूँ।"
परी मुस्कुराई और बोली, "तुम्हारी दयालुता अद्भुत है। मैं तुम्हें वह वरदान देती हूँ। साथ ही, मैं तुम्हें एक जादुई शक्ति भी देती हूँ—अब से तुम जिस भी घायल जीव को छुओगी, वह तुरंत ठीक हो जाएगा।"
इस नई शक्ति के साथ, माया जंगलों और पहाड़ों की यात्रा करने लगी। उसने हर घायल जीव को खोजा और उन्हें ठीक किया। माया की इस महानता को देखकर राजा ने घोषणा की, "जो दूसरों की सेवा करता है, वही राज्य चलाने के योग्य है।" राजा ने माया को रानी घोषित कर दिया और वह हमेशा के लिए सबकी प्रिय बन गई।
Moral
जीव मात्र के प्रति दया भाव रखना ही सबसे बड़ा धर्म है।