एक घने जंगल के पास एक छोटा सा गाँव था, जहाँ नीला और मीना नाम की दो बहनें रहती थीं। वे बहुत गरीब थीं। नीला को एक समस्या थी—वह बहुत जल्दी सब कुछ भूल जाती थी। एक दिन, जंगल में खाना ढूँढते समय, नीला ने अपनी प्यास की परवाह किए बिना एक बूढ़ी औरत को अपना पानी पिला दिया। अचानक, वह बूढ़ी औरत एक सुंदर परी में बदल गई! परी ने नीला को एक जादुई बर्तन दिया और कहा, "जो चाहोगी वह इसमें से मिलेगा, लेकिन इसे रोकने का मंत्र भी याद रखना।" घर आकर दोनों बहनों ने खाने के लिए मंत्र पढ़ा, लेकिन नीला रुकने वाला मंत्र भूल गई। बर्तन से खाना निकलता ही जा रहा था। उन्होंने गाँव के सभी भूखे लोगों को खाना खिलाना शुरू कर दिया। जब एक बूढ़े आदमी ने बताया कि उसके बच्चे भूखे हैं, तो दोनों बहनों ने वह जादुई बर्तन उन्हें दे दिया। उनकी निस्वार्थ भावना देखकर परी फिर से आई, बर्तन उन्हें वापस दिया और नीला की भूलने की बीमारी भी ठीक कर दी।
Moral
परोपकार ही सबसे बड़ा धन है।