बहुत समय पहले, पहाड़ों के पास एक छोटे से गाँव में नीला नाम की एक लड़की अपनी माँ के साथ रहती थी। नीला बहुत प्यारी थी, लेकिन वह एक छोटे से फूल जितनी ही छोटी थी। उसकी माँ उसे बहुत प्यार करती थी।
एक दिन जब नीला बगीचे में खेल रही थी, एक बड़ा मेंढक आया और उसे उठाकर एक तालाब में ले गया। मेंढक ने कहा, "तुम यहीं मेरे साथ रहो!" नीला डर गई और रोने लगी। एक दयालु मछली ने तालाब के किनारे से कमल के पत्ते को थोड़ा काट दिया, जिससे वह पत्ता एक छोटी नाव की तरह तैरने लगा और नीला बच गई।
पर तभी एक बड़ा भँवरा आया और उसे अपने बगीचे में ले गया। वहाँ भी उसे शांति नहीं मिली। वह एक चूहे के बिल में छिप गई, लेकिन एक दूसरे चूहे ने भी उसे अपने साथ रहने के लिए कहा। नीला बहुत परेशान थी।
तभी एक छोटा पक्षी घायल होकर वहाँ गिरा। नीला ने बहुत प्यार से उस पक्षी की देखभाल की और उसे दाना खिलाया। जब पक्षी ठीक हो गया, तो नीला ने अपनी समस्या बताई, "मुझे अपनी माँ के पास जाना है।"
पक्षी ने कहा, "तुमने मेरी जान बचाई है, अब मैं तुम्हारी मदद करूँगा।" पक्षी उसे एक जादुई लड़के के पास ले गया। लड़के ने एक मंत्र पढ़ा और अचानक नीला की पीठ पर सुंदर पंख निकल आए। नीला खुशी-खुशी उड़कर अपनी माँ के पास पहुँच गई।
Moral
दूसरों के प्रति दया भाव रखने से हमें कठिन समय में मदद मिलती है।