एक बहुत ही सुंदर और घना जंगल था। वहाँ दिन में शिकार करने वाले जानवर रात में चैन से सोते थे और रात में जागने वाले जानवर दिन में आराम करते थे। उस जंगल में एक बड़ा बरगद का पेड़ था, जिस पर ओली नाम का एक उल्लू रहता था। ओली रात में शिकार करता था, इसलिए वह दिन भर गहरी नींद में सोता था।
उसी पेड़ पर माइलो नाम का एक बहुत ही शरारती बंदर भी रहता था। माइलो को दूसरों को परेशान करने में बड़ा मज़ा आता था। जब भी ओली सो रहा होता, माइलो पेड़ की टहनियों पर कूदता और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता ताकि ओली की नींद खुल जाए।
एक सुबह माइलो ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "अरे ओली! तुम इतने आलसी क्यों हो? सारा दिन बस सोते ही रहते हो, उठो और हमारे साथ खेलो!"
ओली ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और कहा, "माइलो, कृपया मुझे परेशान मत करो। मैं रात में काम करता हूँ। अगर मैं दिन में आराम नहीं करूँगा, तो रात में शिकार करने की शक्ति कहाँ से लाऊँगा?"
लेकिन माइलो पर कोई असर नहीं हुआ। उसने ओली को और भी ज़्यादा परेशान करना शुरू कर दिया। ओली ने सोचा कि माइलो को सबक सिखाना ज़रूरी है।
उस रात, ओली तालाब के पास रहने वाले मेंढकों के पास गया और बोला, "दोस्तों! आज जंगल के राजा का उत्सव है! हमें मिलकर गाना गाना चाहिए और जश्न मनाना चाहिए!"
मेंढक ज़ोर-ज़ोर से टर्राने लगे— "टर्र-टर्र!" उनकी आवाज़ सुनकर झींगुरों ने भी संगीत छेड़ दिया। यह देखकर जुगनू भी खुश हो गए और वे बरगद के पेड़ के चारों ओर नाचने लगे, जिससे पूरा पेड़ रोशनी से जगमगा उठा। पूरा जंगल एक बड़े संगीत समारोह जैसा लगने लगा।
पेड़ के ऊपर सो रहे माइलो के लिए यह बहुत मुश्किल था। शोर और रोशनी के कारण उसे एक पल भी नींद नहीं आई। वह पूरी रात जागता रहा और बहुत परेशान हुआ।
अगली सुबह जब सूरज निकला, तो माइलो की आँखें लाल थीं और वह बहुत थका हुआ लग रहा था। ओली ने पास आकर पूछा, "क्या हुआ माइलो? क्या शोर की वजह से नींद नहीं आई? जब आप दूसरों की शांति भंग करते हैं, तो कैसा लगता है, अब समझ आया?"
माइलो को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने कहा, "मुझे माफ़ कर दो ओली। मुझे समझ आ गया है कि दूसरों के आराम का सम्मान करना कितना ज़रूरी है।"
उस दिन के बाद से माइलो ने कभी किसी को परेशान नहीं किया।
Moral
दूसरों की शांति और आराम का सम्मान करें; आपकी शरारत आपको ही भारी पड़ सकती है।