एक सुंदर घाटी में, एक बुद्धिमान किसान अपने दो बेटों, अर्जुन और रोहन के साथ रहता था। वे मिलकर एक बड़ा खेत चलाते थे। लेकिन बड़े बेटे अर्जुन के मन में हमेशा एक शिकायत रहती थी। उसे लगता था कि उसके पिता रोहन को ज़्यादा महत्व देते हैं और उसे ही सारी ज़रूरी ज़िम्मेदारियाँ सौंपते हैं।
एक दिन, अर्जुन ने अपने पिता से सीधे पूछ लिया, "पिताजी, क्या आप मुझ पर उतना भरोसा नहीं करते जितना रोहन पर करते हैं? आप उसे ही सारे महत्वपूर्ण काम क्यों देते हैं?"
पिता गुस्सा होने के बजाय उसे एक सबक सिखाना चाहते थे। उन्होंने कहा, "अर्जुन, एक काम करो। पास के फार्म पर जाओ और पूछो कि क्या उनके पास मुर्गियाँ बेचने के लिए हैं?"
अर्जुन तुरंत गया और वापस आकर बोला, "हाँ पिताजी, उनके पास मुर्गियाँ हैं।"
पिता ने कहा, "जाओ और पूछो कि एक मुर्गी की कीमत क्या है?"
अर्जुन फिर गया और लौटा, "एक मुर्गी पचास रुपये की है।"
अब पिता ने रोहन को बुलाया और कहा, "रोहन, तुम भी उसी फार्म पर जाओ और मुर्गियों के बारे में पता करके आओ।"
रोहन खुशी-खुशी गया। जब वह वापस आया, तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी। उसने कहा, "पिताजी, उनके पास दस मुर्गियाँ हैं। एक मुर्गी पचास रुपये की है, लेकिन मैंने उनसे पूछा, 'अगर हम दसों मुर्गियाँ एक साथ खरीदें, तो क्या आप दाम कम करेंगे?' उन्होंने मान लिया और कहा कि वे हमें चालीस रुपये प्रति मुर्गी के हिसाबले बेच देंगे!"
अर्जुन सन्न रह गया। उसने केवल जानकारी इकट्ठा की थी, जबकि रोहन ने अपनी चतुराई से एक बेहतर सौदा कर लिया था। अर्जुन समझ गया कि केवल जानकारी होना काफी नहीं है, बल्कि उस जानकारी का सही इस्तेमाल करना असली बुद्धिमानी है। उस दिन के बाद से, उसने रोहन से ईर्ष्या करना छोड़ दिया और उसके साथ मिलकर काम करना सीख लिया।
Moral
केवल जानकारी इकट्ठा करने और बुद्धि का उपयोग करके अवसर बनाने में बहुत अंतर होता है।