पहाड़ों के बीच बसे एक सुंदर गाँव में, कविन नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। कविन बहुत ही शांत स्वभाव का बच्चा था। जहाँ दूसरे बच्चे मैदान में शोर मचाते और दौड़ते थे, वहीं कविन बहुत धीरे-धीरे अपने काम करता था। चाहे खिलौने समेटना हो या छोटे-मोटे काम, वह सब कुछ बहुत ही धैर्य के साथ करता था। इससे उसके माता-पिता अक्सर परेशान रहते थे। "यह इतना धीमा क्यों है?" उसकी माँ आह भरते हुए कहती। "काश यह दूसरे बच्चों की तरह फुर्तीला होता!"
एक दोपहर, कविन के दादाजी गाँव आए। उन्हें देखकर परिवार बहुत खुश हुआ। कविन के माता-पिता ने दादाजी के सामने अपनी चिंता व्यक्त की। "दादाजी, हम कविन को लेकर चिंतित हैं। इसमें बिल्कुल भी फुर्ती नहीं है और यह छोटे से काम को करने में भी बहुत समय लगाता है," उसके पिता ने कहा।
दादाजी मुस्कुराए। उन्होंने अपने झोले से एक सुंदर नक्काशीदार लकड़ी का बक्सा निकाला। "कविन बेटा, तुम्हारे लिए एक चुनौती है। इस बक्से में कुछ कठिन पहेलियाँ हैं। अगर तुम इन्हें सही से हल कर लेते हो, तो तुम्हें एक खास इनाम मिलेगा," दादाजी ने कहा।
कविन ने बक्सा खोला। उसमें अलग-अलग आकार और रंगों के टुकड़े थे। कविन ने बिना जल्दबाजी किए, हर टुकड़े को बहुत ध्यान से देखा। उसने सोचा कि कौन सा टुकड़ा कहाँ फिट होगा। वह धीरे-धीरे काम कर रहा था, लेकिन उसका हर कदम बिल्कुल सटीक था। उसने एक भी गलती नहीं की और देखते ही देखते उसने पूरी पहेली को एक सुंदर चित्र में बदल दिया।
उसके माता-पिता यह देखकर दंग रह गए। दादाजी ने उनकी ओर देखते हुए कहा, "हर बच्चा अपने तरीके से खास होता है। कविन शायद सबसे तेज़ दौड़ने वाला बच्चा न हो, लेकिन उसकी एकाग्रता और बारीकियों को देखने की क्षमता अद्भुत है। उसकी यही शांति उसकी ताकत है। उसे धीमा होने के लिए डाँटो मत, बल्कि उसकी इस समझदारी को सराहो।"
अपनी गलती का एहसास होने पर, माता-पिता ने कविन को गले लगा लिया और उसकी प्रतिभा का सम्मान करने लगे।
Moral
हर बच्चा अद्वितीय होता है; उनकी गति के बजाय उनकी एकाग्रता और कौशल का सम्मान करें।