एक सुंदर से गाँव में सोमू नाम का एक किसान और उसकी पत्नी मीना रहते थे। सोमू रोज़ खेतों में कड़ी मेहनत करता था, लेकिन उसे अपनी मेहनत का बहुत घमंड था। जब भी वह घर लौटता, वह कहता, "देखो, मैंने आज कितना पसीना बहाया है! अगर मैं मेहनत न करूँ, तो यह खेत बर्बाद हो जाएगा!"
वह मीना से अक्सर बुरा व्यवहार करता था। "तुम सारा दिन घर में करती क्या हो? मैं धूप में तपता हूँ और तुम बस आराम करती हो!" कहकर वह उसका मज़ाक उड़ाता था। इससे मीना बहुत दुखी रहती थी।
एक दिन मीना ने उसे सबक सिखाने का फैसला किया। उसने शांति से कहा, "सोमू, आज हम काम बदल लेते हैं। आज आप घर के सारे काम संभालिए और मैं खेत में जाकर आपकी मदद करूँगी।"
सोमू हँसते हुए बोला, "ठीक है, घर के काम तो बहुत आसान हैं, मैं तुम्हें दिखा दूँगा!"
मीना के खेत पर जाते ही सोमू ने काम शुरू किया। पहले उसने घर की सफाई करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही उसे समझ आया कि झाड़ू लगाना और पोछा लगाना कितना थका देने वाला काम है। इसके बाद, वह गाय को चारा देने और पानी पिलाने गया, जहाँ भारी बाल्टियों और गाय की चंचलता ने उसे परेशान कर दिया।
दोपहर के भोजन की तैयारी करते समय उसे असली चुनौती का सामना करना पड़ा। सब्ज़ियाँ काटना, खाना बनाना और रसोई संभालना बहुत मुश्किल काम था। बर्तन धोने और कपड़े धोने के दौरान उसके हाथ और पीठ में दर्द होने लगा। उसे एहसास हुआ कि पूरे दिन बिना रुके घर की ज़िम्मेदारियाँ निभाना कितना बड़ा काम है।
शाम को जब मीना घर लौटी, तो सोमू थका हुआ बैठा था। उसने मीना की आँखों में देखते हुए कहा, "मीना, मुझे माफ़ कर दो। मुझे लगा था कि तुम्हारा काम आसान है, लेकिन आज मुझे समझ आया कि तुम कितनी मेहनत करती हो। मैंने तुम्हें गलत समझा।"
उस दिन के बाद से सोमू ने कभी शिकायत नहीं की और वह मीना के कामों में हाथ बँटाने लगा।
Moral
दूसरों के श्रम और परिश्रम का सम्मान करना चाहिए।