एक सुंदर राज्य में मीरा नाम की एक साहसी और दयालु राजकुमारी रहती थी। एक दिन माया नाम की एक छोटी लड़की महल आई और बोली, "राजकुमारी, मैंने उस जादुई सुनहरे शेर के बारे में बहुत सी कहानियाँ सुनी हैं। मैं उसे देखना चाहती हूँ। क्या आप मेरे साथ चलेंगी?"
मीरा भी उस रहस्य को जानने के लिए तैयार हो गई। रास्ते में एक चतुर लोमड़ी ने उनका रास्ता रोका और पूछा, "क्या तुम शेर से कोई वरदान मांगने जा रही हो?" मीरा ने शांति से उत्तर दिया, "नहीं, हम बस उस अद्भुत जीव को देखना चाहते हैं, हमें कुछ नहीं चाहिए।"
मीरा की सच्चाई देखकर लोमड़ी ने उन्हें शेर की गुफा का रास्ता बता दिया। जब वे गुफा में पहुँचे, तो सुनहरे शेर ने कहा, "अगर मैं लंबे समय तक जीवित रहना चाहता हूँ, तो मुझे ऊँचे पहाड़ का नीला गुलाब, समुद्र का मोती और जंगल का जादुई फल चाहिए।"
माया ने समुद्र से मोती निकाला, मीरा ने पहाड़ से गुलाब तोड़ा और दोनों ने मिलकर जंगल से फल भी प्राप्त किया। शेर बहुत प्रसन्न हुआ और बोला, "लोग मुझसे हमेशा कुछ न कुछ माँगने आते हैं, लेकिन तुम दोनों ने बिना किसी लालच के मेरी मदद की। तुम्हें बदले में क्या चाहिए?"
माया और मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा, "हमें कुछ नहीं चाहिए, बस आपको देख लिया, यही हमारे लिए काफी है।"
शेर ने उनकी निस्वार्थ भावना देखकर उन्हें ढेर सारा आशीर्वाद दिया।
Moral
बिना किसी स्वार्थ के की गई मदद ही सबसे बड़ी महानता है।