एक विशाल जंगल में गजपति नाम का एक हाथी रहता था। उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था और वह अक्सर छोटे जानवरों को परेशान करता था। जब भी वह पास आता, छोटे जानवर डर के मारे भाग जाते थे।
एक दिन, गजपति ने देखा कि चींटियों की एक टोली बड़ी मेहनत से अपना भोजन इकट्ठा कर रही है। गजपति को उन पर दया नहीं आई, बल्कि उसने उनका मज़ाक उड़ाने की सोची। उसने अपनी सूंड में पास के तालाब से पानी भरा और चींटियों के भोजन पर छिड़क दिया। चींटियों का सारा जमा किया हुआ खाना गीला होकर खराब हो गया। चींटियाँ बहुत दुखी हुईं।
कुछ दिनों बाद, गजपति एक पेड़ के नीचे गहरी नींद में सो रहा था। तभी एक छोटी चींटी चुपके से उसकी सूंड के अंदर घुस गई और उसे जोर-जोर से काटने लगी। दर्द के मारे गजपति चीखते हुए उठा। 'आह! मेरी सूंड में क्या हो रहा है? कोई है जो मुझे काट रहा है? कृपया बाहर आ जाओ!' वह दर्द से तड़पने लगा।
जब चींटी बाहर निकली, तो उसने कहा, 'तुमने सोचा कि हम छोटे हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन देखो हमारी एक छोटी सी काट ने तुम्हें कितना परेशान कर दिया।' गजपति को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने चींटी से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब कभी किसी को परेशान नहीं करेगा। उस दिन के बाद से गजपति जंगल का सबसे दयालु हाथी बन गया।
Moral
किसी को भी उसके आकार से छोटा नहीं समझना चाहिए; असली ताकत दूसरों की मदद करने में है, उन्हें डराने में नहीं।