सूरज ढल रहा था और आर्यन समुद्र के किनारे सुनहरी रेत पर टहल रहा था। तभी उसकी नज़र एक बुजुर्ग व्यक्ति पर पड़ी, जो बार-बार झुककर रेत से कुछ उठा रहे थे और उसे समुद्र में फेंक रहे थे।
आर्यन उनके पास गया और पूछा, "दादाजी, आप यह क्या कर रहे हैं?"
बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, देखो, ये स्टारफिश हैं। तेज़ लहरें इन्हें किनारे पर ले आई हैं। पानी के बिना ये इस गर्मी में जीवित नहीं रह पाएंगी। इसलिए मैं इन्हें वापस समुद्र में छोड़ रहा हूँ।"
आर्यन ने चारों ओर देखा। तट पर हज़ारों स्टारफिश बिखरी हुई थीं। उसने संशय में पूछा, "लेकिन दादाजी, यहाँ तो इतनी सारी मछलियाँ हैं! आप अकेले इतना सब कैसे कर सकते हैं? आपके इस छोटे से प्रयास से इन हज़ारों मछलियों के जीवन में क्या फर्क पड़ेगा?"
बुजुर्ग ने कोई बहस नहीं की। उन्होंने एक छोटी सी स्टारफिश उठाई, उसे सावधानी से अपनी हथेली में रखा और लहरों के बीच फेंक दिया। फिर आर्यन की ओर देखकर बोले, "बेटा, तुम सही कह रहे हो। मैं सबको नहीं बचा सकता। लेकिन इस एक स्टारफिश के लिए, उसकी पूरी दुनिया बदल गई है। अब वह फिर से जीवित है।"
आर्यन को उस पल एक बहुत बड़ी बात समझ आ गई। उसने महसूस किया कि भले ही हम पूरी दुनिया की समस्याओं को हल न कर सकें, लेकिन हमारे छोटे से नेक काम से किसी एक का जीवन ज़रूर बदल सकता है।
Moral
छोटा सा नेक काम भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।