एक भव्य महल में दुनिया भर के प्रतिष्ठित लोगों के लिए एक शानदार भोज का आयोजन किया गया था। उस भोज में रवि नाम का एक विद्वान और एक विदेशी राजनयिक भी शामिल थे।
जब भोजन परोसा गया, तो मेज स्वादिष्ट व्यंजनों से सज गई। राजनयिक ने बहुत ही सलीके से चांदी के चम्मच का उपयोग करके खाना शुरू किया। वहीं दूसरी ओर, रवि ने अपने हाथ अच्छी तरह धोए और अपने हाथों से ही खाना खाना शुरू कर दिया।
राजनयिक ने रवि को देखा और धीरे से कहा, "रवि, आप हाथों से क्यों खा रहे हैं? इस चांदी के चम्मच का उपयोग करें, यह अधिक स्वच्छ और सभ्य तरीका है।"
रवि ने शांति से मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "मित्र, आप सही कह रहे हैं, चम्मच स्वच्छ है। लेकिन एक छोटा सा अंतर है। इस चम्मच का उपयोग कई लोग कर सकते हैं, और यदि कोई इसे ठीक से साफ नहीं करता है, तो यह दूसरों तक कीटाणु फैला सकता है। लेकिन मेरे ये हाथ? इनका उपयोग केवल मैं ही कर सकता हूँ। एक बार जब मैं इन्हें धो लेता हूँ, तो ये पूरी तरह से सुरक्षित और स्वच्छ हैं।"
रवि के इस तर्कपूर्ण और सरल उत्तर को सुनकर राजनयिक दंग रह गए। उन्होंने महसूस किया कि असली स्वच्छता केवल उपकरणों में नहीं, बल्कि हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी में होती है। उन्होंने रवि की बुद्धिमानी की सराहना की।
Moral
सच्ची समझदारी हमारे कार्यों के पीछे के तर्क को समझने में है।