एक शांत गाँव में सैमुअल नाम का एक दयालु किसान रहता था। एक कड़ाके की ठंड वाली शाम को, जब वह अपने खेत में काम कर रहा था, उसने झाड़ियों के पास कुछ हिलते हुए देखा। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह एक छोटा साँप था, जो ठंड के कारण बिल्कुल सुस्त और बेजान हो गया था।
सैमुअल को उस पर बहुत दया आई। उसने सोचा, 'अगर मैंने इसे यहाँ छोड़ दिया, तो यह ठंड से मर जाएगा।' उसने धीरे से साँप को उठाया और अपने गर्म कपड़ों के अंदर, अपने सीने से लगाकर रख लिया ताकि उसे शरीर की गर्मी मिल सके। धीरे-धीरे साँप के शरीर में गर्माहट आने लगी और वह हिलने-डुलने लगा।
जैसे ही साँप में ताकत आई, उसने कृतज्ञता दिखाने के बजाय अचानक सैमुअल के हाथ पर ज़ोर से काट लिया। ज़हर फैलने के कारण सैमुअल को चक्कर आने लगे और वह दर्द से कराहते हुए ज़मीन पर गिर पड़ा। साँप को देखते हुए सैमुअल ने भारी मन से कहा, 'मैंने एक ऐसे जीव पर दया की जो दया का मोल नहीं जानता। मेरी यही भूल मुझे भारी पड़ी।' वह बेहोश हो गया।
बाद में गाँव वालों ने उसकी मदद की। सैमुअल ठीक तो हो गया, लेकिन उसने यह सबक सीख लिया कि हर किसी पर अंधा विश्वास और दया करना सही नहीं होता।
Moral
दुष्ट स्वभाव वाले प्राणियों के प्रति अत्यधिक दया सावधानी से बरतनी चाहिए।