एक बहुत ही सुंदर और घने जंगल में सभी जानवर मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन उस जंगल में गज्जू हाथी और पीकू नाम की एक छोटी नीली चिड़िया हमेशा आपस में लड़ते रहते थे। जब भी गज्जू पेड़ की छाया में आराम करने की कोशिश करता, पीकू उसके कानों के पास आकर ज़ोर-ज़ोर से चहचहाने लगती, जिससे उसकी नींद टूट जाती। गुस्से में आकर गज्जू अपनी सूंड से पेड़ की टहनी को हिला देता, जिससे पीकू नीचे गिर जाती। उनकी इस रोज़ की लड़ाई से जंगल के बाकी जानवर परेशान रहते थे।
एक बूढ़ा बंदर यह सब देख रहा था और उसे बहुत दुख होता था। उसने सोचा कि अगर वे ऐसे ही लड़ते रहे, तो मुसीबत के समय वे एक-दूसरे की मदद नहीं कर पाएंगे। उसने जंगल में शांति लाने के लिए एक छोटी सी योजना बनाई।
सबसे पहले बंदर गज्जू हाथी के पास गया और बोला, "गज्जू भाई, तुम उस नन्ही चिड़िया से इतना गुस्सा क्यों करते हो? क्या तुम्हें पता है कि वह तुम्हारी कितनी परवाह करती है?" गज्जू चिंघाड़ते हुए बोला, "वह छोटी चिड़िया मुझे बहुत परेशान करती है!" बंदर ने धीरे से कहा, "नहीं गज्जू, कल जब तुम सो रहे थे, तो कुछ कीड़े तुम्हें काट रहे थे। पीकू तुम्हें परेशान नहीं कर रही थी, बल्कि वह तुम्हें ज़ोर से आवाज़ देकर जगा रही थी ताकि तुम उन कीड़ों से बच सको!"
फिर बंदर पीकू चिड़िया के पास गया और पूछा, "पीकू, तुम गज्जू से इतनी नाराज़ क्यों रहती हो?" पीकू उदास होकर बोली, "वह हमेशा पेड़ की टहनी हिला देता है और मैं नीचे गिर जाती हूँ!" बंदर ने फुसफुसाते हुए कहा, "पीकू, क्या तुम्हें पता है? पिछले हफ्ते जब तुम सो रही थी, तब एक बड़ा सांप तुम्हें पकड़ने के लिए टहनी पर चढ़ रहा था। गज्जू ने उसे देखा और अपनी सूंड से टहनी हिला दी ताकि तुम जाग जाओ और तुम्हारी जान बच जाए!"
यह सुनकर गज्जू और पीकू दंग रह गए। उन्हें एहसास हुआ कि वे दुश्मन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के रक्षक हैं। उस दिन के बाद से उनकी लड़ाई खत्म हो गई। अब वे जंगल में एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते हैं और शांति से रहते हैं। बूढ़े बंदर की उस छोटी सी चतुराई ने पूरे जंगल को खुशहाल बना दिया।
Moral
गलतफहमी से दुश्मनी बढ़ती है, लेकिन सच्चाई जानने पर प्रेम बढ़ता है।