एक घने जंगल के बीचों-बीच एक सुंदर नीला तालाब था। उस तालाब में कई तरह की मछलियाँ खुशी-खुशी रहती थीं। जंगल इतना शांत था कि मछलियों को कभी किसी बात का डर नहीं था। वे सारा दिन पानी में उछलती-कूदती और खेलती रहती थीं।
एक शाम, दो शिकारी उस तालाब के पास से गुज़रे। तालाब में मछलियों को खेलते देख उनकी आँखें चमक उठीं। एक शिकारी ने कहा, "देखो, इस तालाब में तो बहुत सारी मछलियाँ हैं! कल सुबह जल्दी आकर हम जाल डालेंगे और इन्हें पकड़ लेंगे।"
किनारे पर तैर रही कुछ छोटी मछलियों ने यह बात सुन ली। वे डर गईं और तुरंत तालाब की दूसरी मछलियों को यह खबर देने गईं। लेकिन बड़ी मछलियों ने उनकी बात पर यकीन नहीं किया। उन्होंने कहा, "हम यहाँ सालों से सुरक्षित हैं, अब अचानक क्या खतरा है? हम अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाएँगे।"
परंतु, कुछ चतुर मछलियों ने खतरे को भांप लिया। वे चुपके से एक छोटी सी जलधारा के रास्ते पास के एक दूसरे बड़े जलाशय में चली गईं।
अगली सुबह जब शिकारी आए, तो उन्होंने तालाब में जाल फेंक दिया। जो मछलियाँ वहीं रुकी हुई थीं, वे सब जाल में फंस गईं। उन्हें बहुत पछतावा हुआ कि काश उन्होंने छोटी मछलियों की बात मान ली होती।
Moral
समय रहते सावधानी बरतना ही बुद्धिमानी है।