हरे-भरे खेतों के पास बसे एक छोटे से गाँव में सोमू नाम का एक दूधवाला रहता था। रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले, सोमू अपनी गायों का दूध निकालता और उसे पास के बाज़ार में बेचने के लिए भारी बर्तन लेकर निकल पड़ता था।
सोमू एक मेहनती आदमी था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी। वह जो भी पैसे कमाता, उन्हें बचाने के बजाय फालतू की चीज़ों पर खर्च कर देता था। वह भविष्य के बारे में कभी नहीं सोचता था।
एक दिन बाज़ार में सोमू ने एक व्यापारी को सुंदर मुर्गियाँ बेचते हुए देखा। उन्हें देखते ही सोमू के मन में एक योजना आई। उसने सोचा, 'अगर मैं एक मुर्गी खरीद लूँ, तो वह बहुत सारे अंडे देगी। उन अंडों से छोटे चूजे निकलेंगे। फिर वे चूजे बड़े होकर बहुत सारी मुर्गियाँ बन जाएँगे। मैं उन सबको बेचकर बहुत अमीर बन जाऊँगा!'
इसी ख्याली पुलाव में खोया हुआ सोमू यह भूल गया कि उसके हाथ में दूध का भारी बर्तन है और रास्ता ऊबड़-खाबड़ है। उत्साह में चलते-चलते उसका पैर एक पत्थर से टकराया और दूध का बर्तन हाथ से छूटकर ज़मीन पर गिर गया। सारा दूध मिट्टी में मिल गया और बर्तन भी टूट गया।
सोमू यह देखकर दंग रह गया कि उसके एक पल के सपने ने उसकी पूरे दिन की मेहनत को बर्बाद कर दिया। उसे समझ आया कि बिना मेहनत के केवल अमीर बनने के सपने देखना मूर्खता है। उसने सीखा कि भविष्य के सपने देखने से बेहतर है कि हम अपने वर्तमान काम पर ध्यान दें।
Moral
भविष्य के सपनों में खोकर अपने वर्तमान के काम को न भूलें।