एक घने जंगल में एक शक्तिशाली शेर, एक चतुर लोमड़ी और एक सीधा-सादा गधा रहते थे। एक दिन, उन्होंने मिलकर शिकार करने का फैसला किया। उन्होंने एक समझौता किया: गधा पैरों के निशान ढूँढेगा, लोमड़ी शिकार को भागने से रोकेगी, और शेर शिकार करेगा। वे तय करते हैं कि शिकार को तीनों में बराबर बाँटा जाएगा।
जल्द ही, गधे को झाड़ियों के पीछे हिरण के पैरों के निशान मिले। लोमड़ी तेज़ी से आगे बढ़ी और हिरण के रास्ते को रोक दिया ताकि वह भाग न सके। तभी शेर ने झपट्टा मारा और हिरण का शिकार कर लिया।
शेर ने गधे से कहा, 'इस भोजन को हम तीनों में बराबर बाँट दो।' गधा बहुत ईमानदार था, उसने मांस के तीन बिल्कुल बराबर हिस्से किए। यह देखकर शेर को गुस्सा आ गया। 'मैं जंगल का राजा हूँ! मुझे सबसे ज़्यादा मिलना चाहिए!' शेर दहाड़ा और गुस्से में गधे को वहाँ से भगा दिया।
अब शेर लोमड़ी के पास गया और बोला, 'अब तुम बाँटो, लेकिन ध्यान रहे कि मुझे सबसे बड़ा हिस्सा मिले।' लोमड़ी ने शांति से कहा, 'जी महाराज।' लोमड़ी ने मांस का एक बहुत बड़ा हिस्सा शेर को दे दिया और अपने लिए बस एक छोटा टुकड़ा रखा। शेर बहुत खुश हुआ और बोला, 'लोमड़ी, तुम कितनी समझदार और उदार हो!'
लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'महाराज, गधे ने बराबरी का सबक बहुत बुरी तरह सीखा। मैंने बस अपनी सुरक्षा का रास्ता चुना है।' शेर को लोमड़ी की चतुराई समझ आ गई और उसने शांत रहना सीख लिया।