एक सुंदर नदी के किनारे, कासी नाम का एक कछुआ रहता था। कासी को अपने सख्त और मजबूत कवच पर बहुत घमंड था। वह अक्सर दूसरे जानवरों के छोटे घरों का मजाक उड़ाया करता था।
एक सुनहरी दोपहर, चिटू नाम की एक गौरैया एक बड़े बरगद के पेड़ की टहनी पर अपना घोंसला बना रही थी। चिटू बहुत सावधानी से तिनकों और छोटी लकड़ियों को इकट्ठा करके अपना घर सजा रही थी।
यह देखकर कासी कछुआ धीरे-धीरे रेंगते हुए आया और हंसते हुए बोला, "अरे चिटू! तुम इन कमजोर टहनियों से क्या बना रही हो? जरा सी हवा चलेगी और तुम्हारा घर उड़ जाएगा! मुझे देखो, मेरा कवच कितना मजबूत है! कोई इसे तोड़ नहीं सकता!"
चिटू ने शांति से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "कासी, तुम्हारा कवच मजबूत है, यह सच है। लेकिन तुम्हारा कवच सिर्फ तुम्हारे लिए है। तुम अपने घर में किसी को बुला नहीं सकते। लेकिन मेरा घोंसला देखो! मेरे दोस्त और रिश्तेदार यहाँ आते हैं, यहाँ आराम करते हैं और हम सब मिलकर खुशी से गाते हैं। घर केवल मजबूती से नहीं, बल्कि प्यार और मिलजुलकर रहने से बनता है।"
चिटू की बात सुनकर कासी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसे समझ आया कि वह कितना घमंडी था। दूसरों के परिश्रम का मजाक उड़ाने के कारण, कासी शर्म से अपना सिर झुकाकर वहाँ से चुपचाप चला गया।
Moral
अहंकार से बड़ा प्रेम और मिलजुलकर रहना है।