एक शांत घाटी में सोमू नाम का एक मेहनती किसान रहता था। उसके खेत में बहुत सारी सब्जियाँ उगती थीं, लेकिन उन्हें बाज़ार तक ले जाना मुश्किल था। इसलिए, उसने एक मज़बूत गधा खरीदा। अपने नए साथी के साथ, सोमू जंगल के रास्ते अपने घर की ओर चल पड़ा।
पास की झाड़ियों के पीछे तीन चालाक चोर छिपे हुए थे। उन्होंने सोमू को देखा और सोचा, 'यह गधा बहुत अच्छा है, इसे चुरा लेते हैं।' वे जानते थे कि राजा के सैनिक चोरों के लिए बहुत सख्त हैं, इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई: यदि वे किसान को डराकर भगा सकें, तो वे बिना पकड़े गए भाग सकते हैं।
दोपहर की धूप तेज़ थी, इसलिए सोमू ने एक बड़े बरगद के पेड़ की छाया में आराम करने का फैसला किया। तभी, पहला चोर एक यात्री बनकर सोमू के पास आया। उसने डराते हुए कहा, 'सावधान रहिए सेठ जी! इस जंगल में एक रूप बदलने वाला राक्षस रहता है। वह बिल्कुल इंसान जैसा दिखता है, पर असल में वह एक राक्षस है!' सोमू ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और सो गया।
जब सोमू सो रहा था, तभी दूसरे चोर ने चुपके से गधे की रस्सी निकाली और उसे अपने गले में डाल लिया ताकि वह यात्री जैसा दिखे। तीसरा चोर गधे को ले जाने के लिए तैयार था। कुछ देर बाद जब सोमू की नींद खुली, तो उसने देखा कि गधे की जगह एक आदमी खड़ा है। 'अरे! मेरा गधा कहाँ गया? यहाँ यह आदमी क्यों है?' सोमू चिल्लाया।
यह सुनते ही पहला चोर ज़ोर से चिल्लाया, 'भागो! भागो! वह रूप बदलने वाला राक्षस आ गया! उसने इंसान का रूप ले लिया है!' वह डर के मारे भाग खड़ा हुआ। बाकी चोर भी घबरा गए और भागते समय आपस में उलझ गए। उनका इरादा किसान को डराकर चोरी करने का था, लेकिन उनके अपने ही झूठ ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया और उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
Moral
धोखे से किया गया काम कभी सफल नहीं होता; चालाकी अंत में खुद के लिए मुसीबत बन जाती है।