एक घने जंगल के पास बसे एक सुंदर गाँव में कविन और मिथुन नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। कविन बहुत चंचल था, जबकि मिथुन शांत और बेहद साहसी था।
एक दिन खेलते-खेलते वे जंगल के किनारे तक पहुँच गए। अचानक कविन का पैर फिसल गया और वह झाड़ियों में छिपे एक पुराने, गहरे कुएँ में गिर गया। कविन डर के मारे चिल्लाने लगा, "मिथुन! मुझे बचाओ! मैं बाहर नहीं निकल पा रहा हूँ!"
मिथुन घबराया नहीं। उसने आस-पास देखा और उसे एक पुरानी रस्सी और एक छोटा सा बाल्टी दिखाई दी। मिथुन तुरंत कुएँ के पास गया और बोला, "कविन, इस बाल्टी को मजबूती से पकड़ लो! डरो मत, मैं तुम्हें बाहर निकालूँगा!"
मिथुन ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और धीरे-धीरे रस्सी खींचने लगा। यह बहुत कठिन था, लेकिन उसने हार नहीं मानी। काफी मशक्कत के बाद, मिथुन ने कविन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जब वे गाँव लौटे, तो गाँव वाले इकट्ठा हो गए। कुछ लोगों ने संदेह जताते हुए कहा, "एक छोटा बच्चा इतने गहरे कुएँ से किसी को कैसे निकाल सकता है? यह नामुमकिन है!"
तभी वहाँ एक बुजुर्ग व्यक्ति आगे आए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "आप गलत सोच रहे हैं। मिथुन ने अपने दोस्त को केवल अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपने अटूट विश्वास से बचाया है। अगर आप में से किसी ने कहा होता कि 'तुम बहुत छोटे हो, तुम यह नहीं कर सकते', तो उसका आत्मविश्वास टूट जाता और वह अपने दोस्त को नहीं बचा पाता। हमें बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए, उसे तोड़ना नहीं।"
गाँव वालों को अपनी गलती का एहसास हुआ और सबने मिथुन की बहादुरी की प्रशंसा की।
Moral
आत्मविश्वास और सच्ची मित्रता से हर मुश्किल आसान हो जाती है।