एक घने और सुंदर जंगल में बहुत सारे पक्षी रहते थे। जंगल के जानवरों का तो एक राजा था, लेकिन पक्षियों का अपना कोई नेता नहीं था। इसलिए, सभी पक्षियों ने मिलकर एक नया राजा चुनने का फैसला किया।
सभी पक्षी एक बड़े पेड़ पर इकट्ठा हुए। एक बूढ़े उल्लू ने सुझाव दिया, "जो पक्षी दिखने में सबसे शानदार और भव्य हो, वही राजा होना चाहिए।" लेकिन एक मैना ने कहा, "नहीं, राजा वह होना चाहिए जो आसमान में सबसे ऊँचा उड़ सके!"
यह सुनकर बाज ने अपने बड़े पंख फैलाए और गर्व से कहा, "मैं ही आसमान का राजा हूँ! मैं बादलों को छू सकता हूँ। इसलिए, राजा मैं ही हूँ!"
तभी एक छोटी सी गौरैया आगे आई और बोली, "सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होता। क्यों न हम एक उड़ान प्रतियोगिता रखें? जिससे पता चल सके कि वास्तव में सबसे श्रेष्ठ कौन है।"
सभी पक्षी मान गए और प्रतियोगिता शुरू हुई। बाज बहुत ऊँचाई पर उड़ने लगा। लेकिन जैसे-जैसे वह ऊपर गया, ठंडी हवा और ऊंचाई के डर से उसका हौसला डगमगाने लगा। वह वापस नीचे आने की सोचने लगा। तभी एक चमत्कार हुआ। वह छोटी सी गौरैया, बहुत ही फुर्ती और तेजी से बाज के ठीक ऊपर से निकल गई। वह उस ऊंचाई तक पहुँच गई जहाँ बाज जाने से डर रहा था।
गौरैया की इस अद्भुत गति और साहस को देखकर सभी पक्षी दंग रह गए। उन्होंने देखा कि आकार में छोटा होने के बावजूद, गौरैया में गजब की हिम्मत और कुशलता है। सभी पक्षियों ने मिलकर नन्ही गौरैया को अपना नया राजा घोषित कर दिया।
Moral
कभी भी किसी को उसके आकार से नहीं आंकना चाहिए; असली शक्ति कौशल में होती है।