पहाड़ों के बीच बसे एक सुंदर राज्य में राजा धर्म और उनकी बेटी राजकुमारी नीला रहती थी। नीला दिखने में बहुत सुंदर थी, लेकिन उसे बहुत घमंड था। उसे लगता था कि वह राजकुमारी है, इसलिए बाकी सब उससे छोटे हैं। वह महल के नौकरों और जानवरों से कभी प्यार से बात नहीं करती थी।
राजा अक्सर उसे समझाते थे, "नीला, असली महानता दूसरों का सम्मान करने में है," लेकिन नीला उनकी बात नहीं सुनती थी। एक दिन राजा ने नीला को खेलने के लिए एक चमकता हुआ नीला रत्न दिया। बगीचे में खेलते समय, वह रत्न अचानक गहरे तालाब में गिर गया।
अपना कीमती रत्न खो जाने पर नीला फूट-फूट कर रोने लगी। तभी एक छोटा हरा मेंढक वहां आया और बोला, "राजकुमारी, आप क्यों रो रही हैं?"
नीला ने रोते हुए अपनी समस्या बताई और रत्न वापस लाने की विनती की। मेंढक ने कहा, "मैं रत्न ढूंढ लाऊंगा, लेकिन बदले में तुम्हें एक वादा करना होगा। अगले तीन दिनों तक तुम्हें अपने भोजन की थाली में से मुझे खाना खिलाना होगा और मुझे अपने महल में रहने देना होगा।"
रत्न पाने की जल्दी में नीला ने बिना सोचे-समझे हाँ कह दिया। मेंढक पानी में गया और रत्न ढूंढ लाया। रत्न मिलते ही नीला बिना मेंढक की तरफ देखे महल की ओर भाग गई।
अगले दिन जब राजा भोजन कर रहे थे, मेंढक वहां आया और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। राजा ने नीला को बुलाया और कहा, "नीला, एक राजा का वचन ही उसकी पहचान होती है। तुमने जो वादा किया है, उसे निभाओ।"
नीला को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने तीन दिनों तक मेंढक को अपने हाथ से खाना खिलाया। तीसरे दिन रात को मेंढक राजकुमारी के बिस्तर के पास ही सोया। अगली सुबह एक चमत्कार हुआ! मेंढक गायब था और वहां एक सुंदर राजकुमार खड़ा था।
राजकुमार ने कहा, "नीला, मैं एक श्राप के कारण मेंढक बना था। तुमने मुझे धोखा देने की कोशिश की थी, लेकिन अपने पिता की सीख मानकर तुमने अपना वादा निभाया। तुम्हारी इसी ईमानदारी ने मुझे मुक्त कर दिया।"
नीला ने अपनी गलती के लिए माफी मांगी और वे दोनों खुशी-खुशी रहने लगे।
Moral
अपने वादे को निभाना और दूसरों का सम्मान करना ही इंसान को महान बनाता है।