एक घने जंगल के किनारे एक पुराने पेड़ पर 'कालू' नाम का एक कौआ रहता था। कालू बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसमें एक बहुत बड़ी कमी थी—वह हमेशा दूसरों की नकल करने की कोशिश करता था। उसे आसमान के राजा, बाज को देखकर बहुत जलन होती थी।
'वह बाज कितना ऊँचा उड़ता है! उसमें कितनी ताकत है! अगर मैं भी बाज की तरह उड़ूँ, तो सब मेरी इज़्ज़त करेंगे,' कालू अक्सर खुद से कहता था।
एक दोपहर, कालू एक ऊँची टहनी पर बैठकर बाज का शिकार देख रहा था। उसने देखा कि कैसे एक बाज बिजली की गति से नीचे आया, एक छोटे खरगोश को अपने पंजों में दबाया और शान से बादलों के ऊपर उड़ गया। यह देखकर कालू के मन में भी अहंकार आ गया।
'यह तो बहुत आसान है!' कालू ने सोचा। 'मैं भी कुछ बड़ा करके दिखाऊँगा।'
अपनी ताकत दिखाने के चक्कर में, कालू नीचे घास के मैदान में उतरा जहाँ बकरियों का एक झुंड चर रहा था। उसने एक छोटे मेमने को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन कालू के पास बाज जैसी ताकत नहीं थी। जब वह मेमने को खींचने के लिए संघर्ष कर रहा था, तो बकरियों को लगा कि वह उनके बच्चे पर हमला कर रहा है।
बकरियाँ डर गईं और गुस्से में आकर कालू पर हमला कर दिया। कालू छोटा था और उन बकरियों का मुकाबला नहीं कर सका। वह ज़मीन पर गिर पड़ा और अपनी जान गँवा दी। उसे अपनी गलती का अहसास तब हुआ जब बहुत देर हो चुकी थी।
दूसरों जैसा बनने की कोशिश में उसने अपनी असली पहचान और अपनी सीमाएं भूल दी थीं।
Moral
दूसरों की नकल करने की कोशिश में अपनी सीमाएं न भूलें; अपनी क्षमताओं को पहचानना ही बुद्धिमानी है।