एक छोटे से गाँव में मिटन्स और स्नो नाम की दो बिल्लियाँ रहती थीं। वे बहुत अच्छी दोस्त थीं और हमेशा साथ मिलकर रहती थीं।
एक दिन उन्हें बहुत तेज़ भूख लगी। उन्होंने पूरे गाँव में खाना ढूँढा, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। तभी उन्हें एक बड़े से घर के बाहर एक बड़ा बिस्किट का टुकड़ा मिला। बिस्किट देखते ही दोनों के मन में लालच आ गया। मिटन्स ने कहा, "यह मेरा है!" स्नो चिल्लाई, "नहीं, यह मेरा है!" दोनों के बीच ज़ोरदार झगड़ा होने लगा।
पास के पेड़ पर बैठा एक बंदर, मोंटी, यह सब देख रहा था। मोंटी बहुत चालाक था। उसने सोचा कि क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाए। वह नीचे आया और बहुत प्यार से बोला, "प्यारे दोस्तों, लड़ो मत! मैं इस बिस्किट को बिल्कुल बराबर हिस्सों में बाँट देता हूँ।"
बिल्लियों ने उसकी बात मान ली। मोंटी एक छोटी तराजू लेकर आया। उसने बिस्किट के दो टुकड़े किए और उन्हें तराजू के दोनों पलड़ों में रख दिया। एक पलड़ा भारी होने के कारण नीचे झुक गया। मोंटी बोला, "ओह! यह टुकड़ा तो बहुत बड़ा है," और उसने उस टुकड़े से एक बड़ा हिस्सा खा लिया।
अब दूसरा पलड़ा भारी हो गया। मोंटी ने कहा, "अरे! अब यह वाला बड़ा हो गया," और उसने दूसरे टुकड़े से भी एक बड़ा हिस्सा खा लिया। वह बार-बार ऐसा ही करता रहा। बिल्लियाँ हैरानी से देखती रहीं और बिस्किट धीरे-धीरे खत्म होता गया।
जब बिल्लियों को समझ आया कि मोंटी उन्हें बेवकूफ बना रहा है, तो वे बोलीं, "मोंटी, बस करो! हमें बराबर हिस्सा नहीं चाहिए, जो बचा है वही हमें दे दो, हम खुद बाँट लेंगे।"
मोंटी हँसा और बोला, "इतनी देर से इस तराजू को बराबर करने के लिए मैंने कितनी मेहनत की है! मेरी मेहनत की मज़दूरी के रूप में यह बचा हुआ टुकड़ा मेरा हुआ!" इतना कहकर मोंटी ने आखिरी टुकड़ा भी खा लिया और पेड़ पर चढ़ गया।
मिटन्स और स्नो बहुत दुखी हुईं। उन्हें समझ आ गया कि अगर वे आपस में न लड़तीं, तो बिस्किट का आनंद ले सकती थीं।
Moral
आपसी झगड़े में हमेशा तीसरे का फायदा होता है।