एक घने जंगल में लोकी नाम की एक लोमड़ी रहती थी। लोकी बहुत ही आलसी और धूर्त थी। जब वह दूसरे जानवरों को मेहनत करके भोजन इकट्ठा करते देखती, तो उसे जलन होती थी। इसलिए, वह चुपके से दूसरे जानवरों के छिपाए हुए फल और जड़ें चुराकर खा लेती थी। उसकी इस आदत की वजह से जंगल के सभी जानवर उससे दूर रहने लगे थे।
चिंटू नाम के एक समझदार खरगोश ने यह सब देखा। उसने सोचा, 'लोकी को सबक सिखाना बहुत ज़रूरी है, ताकि वह चोरी करना छोड़ दे।'
चिंटू ने एक योजना बनाई। उसने जंगल के एक कोने में खेती करने का फैसला किया। उसने सबको बताया, 'मैं यहाँ बहुत ही स्वादिष्ट गाजर उगाऊँगा!' चिंटू दिन-रात मेहनत करता, मिट्टी खोदता और पौधों को पानी देता। लोकी झाड़ियों के पीछे से यह सब देख रही थी। उसने मन ही मन सोचा, 'वाह! यह खरगोश तो मेरे लिए दावत तैयार कर रहा है! जल्द ही मुझे चोरी करने के लिए बहुत सारा खाना मिलेगा।'
कुछ हफ़्तों बाद, खेत में ताज़ी और लाल गाजरें उगने लगीं। लोकी से और इंतज़ार नहीं हुआ। एक अंधेरी रात में, वह चुपके से खेत में घुस गई। गाजरें निकालने की जल्दी में उसने यह ध्यान ही नहीं दिया कि चिंटू ने गाजर के पौधों के बीच में बहुत सारे कांटेदार झाड़ और कटीली झाड़ियाँ लगाई थीं।
जैसे ही लोकी खेत में दौड़ी, उन काँटों ने उसके शरीर को बुरी तरह छील दिया। कुछ ही देर में लोकी के पूरे शरीर में तेज़ खुजली और जलन होने लगी। वह दर्द से तड़पने लगी। तभी चिंटू वहाँ आया और बोला, 'लोकी, तुम्हें लगा कि दूसरों की मेहनत चुराना बहुत आसान है? मैंने ये कटीली झाड़ियाँ अपने खेत की रक्षा करने के लिए ही लगाई थीं।'
जंगल के बाकी जानवर भी वहाँ जमा हो गए। लोकी की हालत देखकर सबने राहत की साँस ली कि आखिरकार उसे उसके किए की सजा मिल गई। लोकी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने वादा किया कि वह अब कभी चोरी नहीं करेगी और मेहनत से अपना जीवन बिताएगी।
Moral
चोरी का फल हमेशा बुरा होता है; मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।