एक सुंदर तटीय गाँव में सोमू नाम का एक मछुआरा रहता था। उसके पास मनु नाम का एक छोटा और वफादार कुत्ता था। सोमू रोज़ सुबह मछली पकड़ने जाता और शाम को मछलियों की टोकरी लेकर घर लौटता। रास्ते में एक बड़ा बरगद का पेड़ था, जहाँ वे थोड़ा आराम करने के लिए रुकते थे।
एक दिन सोमू बहुत थक गया था। घर से वह रस्सी लाना भूल गया जिससे वह मनु को पेड़ से बाँधता था। जब वे पेड़ के नीचे पहुँचे, तो मनु इधर-उधर कूदने लगा। सोमू को डर था कि अगर उसने मनु को छोड़ दिया, तो वह जंगल में कहीं खो जाएगा। इसलिए, सोमू ने थके होने के बावजूद एक हाथ से मनु के गले को पकड़ रखा ताकि वह वहीं रहे। यह उसके लिए बहुत थका देने वाला था।
तभी वहाँ से एक ज्ञानी साधु गुजरे। सोमू की हालत देखकर उन्होंने पूछा, "बेटा, तुम इतने परेशान क्यों हो?" सोमू ने अपनी समस्या बताई। साधु मुस्कुराए और बोले, "चिंता मत करो! मेरे पास एक जादुई रस्सी है। यह दिखाई नहीं देती, लेकिन यह किसी भी जानवर को एक जगह रोक सकती है।"
साधु ने मंत्र पढ़ने का नाटक किया और हवा में रस्सी बाँधने का अभिनय किया। सोमू को पूरी तरह विश्वास तो नहीं था, फिर भी उसने आराम करने का फैसला किया। जब उसकी आँख खुली, तो उसने देखा कि मनु बिल्कुल शांत खड़ा था। सोमू हैरान रह गया, "अरे! साधु की जादुई रस्सी तो सच में काम कर गई!"
सोमू दौड़कर साधु के पास गया और बोला, "महाराज, कृपया उस जादुई रस्सी को खोल दीजिए ताकि हम घर जा सकें!"
साधु धीरे से हँसे और बोले, "सोमू, वहाँ कोई जादुई रस्सी नहीं है। मैंने तो बस नाटक किया था। लेकिन मनु ने तुम्हारे विश्वास को देख लिया और उसे लगा कि वह बँधा हुआ है, इसलिए वह वहीं खड़ा रहा। तुम्हारी आस्था ही वह बंधन थी!"
सोमू समझ गया कि जैसे मनु एक अदृश्य विश्वास से बंधा था, वैसे ही इंसान भी अपने डर और संदेह के कारण एक ही जगह रुक जाता है। अगर हम खुद पर भरोसा करें, तो हम आगे बढ़ सकते हैं।
Moral
आत्मविश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति है; संदेह वह अदृश्य जंजीर है जो हमें आगे बढ़ने से रोकती है।