एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा तालाब था, जहाँ पिप नाम का मेंढक और स्क्वीक नाम का चूहा रहते थे। वे दोनों बहुत गहरे दोस्त थे। लेकिन एक साल भीषण गर्मी के कारण तालाब का पानी सूख गया।
अपने दोस्त मेंढक को प्यासा देख, चूहे ने मदद करने का फैसला किया। वह पूरे जंगल में भटकता रहा और अंत में उसे चट्टानों के बीच छिपा हुआ एक नया जलकुंड मिल गया। वह खुशी-खुशी मेंढक को वहाँ लेकर आया।
शुरुआत में दोनों बहुत खुश थे, लेकिन जल्द ही उनके मन में अहंकार आ गया।
चूहे ने गर्व से कहा, "इस कुंड को मैंने खोजा है, इसलिए इसका राजा मैं हूँ!"
मेंढक को गुस्सा आ गया। उसने कहा, "तुम तो बस किनारे पर रहते हो, असली राजा तो मैं हूँ क्योंकि मैं इसके पानी में रहता हूँ!"
यह छोटी सी बहस एक बड़ी लड़ाई में बदल गई। चूहा अपने सभी दोस्तों को ले आया और मेंढक भी अपने साथियों को बुला लाया। किनारे पर चूहे और पानी में मेंढक आपस में लड़ने लगे।
ऊपर आसमान में एक बाज यह सब देख रहा था। जब चूहे और मेंढक अपनी लड़ाई में इतने व्यस्त हो गए कि उन्हें खतरे का अहसास ही नहीं हुआ, तब बाज तेजी से नीचे आया और एक-एक करके उन सबको पकड़ने लगा।
बेमतलब की लड़ाई और अहंकार के चक्कर में, उन दोनों दोस्तों ने अपनी जान गंवा दी और वह सुंदर जलकुंड फिर से खाली हो गया।
Moral
अहंकार और बेवजह की लड़ाई हमेशा नुकसान पहुँचाती है।