एक सुंदर घाटी में सैमुअल नाम का एक बुद्धिमान किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे: लियो, मैक्स और सैम। तीनों बहुत मेहनती थे, लेकिन उनमें एक बड़ी कमी थी—वे कभी किसी बात पर सहमत नहीं होते थे। छोटी-छोटी बातों पर वे आपस में झगड़ते रहते थे, जिससे उनके पिता बहुत परेशान रहते थे।
एक दिन सैमुअल ने उन्हें एक ऐसा सबक सिखाने का फैसला किया जिसे वे कभी न भूलें। उसने लकड़ी की कुछ मोटी और मजबूत टहनियां लीं और उन्हें एक मजबूत रस्सी से कसकर बांध दिया।
'मेरे बेटों, सुनो,' सैमुअल ने उन्हें पास बुलाकर कहा। 'तुम्हारे लिए एक चुनौती है। जो इस लकड़ियों के गट्ठर को तोड़ेगा, उसे एक विशेष इनाम मिलेगा।'
सबसे बड़े बेटे लियो ने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़कर गट्ठर को पकड़ लिया। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी, उसका चेहरा लाल हो गया, लेकिन लकड़ियाँ टस से मस नहीं हुईं। फिर मैक्स ने कोशिश की, उसने अपने घुटनों का सहारा लेकर दबाव डाला, फिर भी गट्ठर नहीं टूटा। अंत में सैम ने भी पूरी कोशिश की, लेकिन वह गट्ठर पत्थर की तरह मजबूत था।
'यह असंभव है, पिताजी!' मैक्स ने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा। 'जब ये लकड़ियाँ एक साथ बंधी हैं, तो इन्हें कोई नहीं तोड़ सकता।'
सैमुअल धीरे से मुस्कुराया और रस्सी खोल दी। 'अब, इन्हें एक-एक करके तोड़ने की कोशिश करो,' उसने कहा।
बच्चों ने अलग-अलग लकड़ियाँ उठाईं। एक झटके में, हर लकड़ी आसानी से टूट गई। वे हैरान रह गए।
'क्या तुमने देखा?' सैमुअल ने समझाया। 'जब तुम अकेले और अलग-अलग होते हो, तो तुम इन अकेली लकड़ियों की तरह होते हो—जिन्हें जीवन की मुश्किलें आसानी से तोड़ सकती हैं। लेकिन जब तुम एक साथ मिलकर खड़े होते हो और एक-दूसरे का साथ देते हो, तो तुम इस गट्ठर की तरह बन जाते हो—अजेय और मजबूत।'
तीनों भाइयों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया और वादा किया कि वे अब से हमेशा एक टीम की तरह रहेंगे।
Moral
एकता में ही शक्ति है; साथ मिलकर हम अटूट हैं।