एक घने जंगल के किनारे सोमू नाम का एक लकड़हारा रहता था। वह अपनी पुरानी कुल्हाड़ी से लकड़ियाँ काटकर अपना गुजारा करता था। एक दिन जंगल में काम करते समय, अचानक उसकी कुल्हाड़ी का लकड़ी का हत्था टूट गया।
सोमू बहुत दुखी हुआ और वहीं बैठ गया। "अब मैं क्या करूँगा? बिना कुल्हाड़ी के मैं लकड़ी कैसे काटूँगा? मैं अपने परिवार का पेट कैसे पालूँगा?" वह रोने लगा। उसकी आवाज़ सुनकर पास के एक विशाल बरगद के पेड़ ने दया भाव से कहा, "सोमू, तुम रोओ मत। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। मेरी एक मजबूत टहनी को तुम काट सकते हो। उससे तुम अपनी कुल्हाड़ी के लिए नया हत्था बना सकते हो।"
सोमू बहुत खुश हुआ। उसने पेड़ की टहनी काटी और अपनी कुल्हाड़ी का नया हत्था बना लिया। अगले दिन जब सोमू काम करने आया, तो उसकी कुल्हाड़ी पहले से भी ज्यादा मजबूत थी। जैसे ही सोमू उस बरगद के पेड़ के पास पहुँचा, पेड़ डर के मारे कांपने लगा। पेड़ ने मन ही मन सोचा, "हाय! मुझे चुप रहना चाहिए था। मदद करने के चक्कर में मैंने खुद को ही मुसीबत में डाल दिया!"
सोमू ने जैसे ही पेड़ के पास की टहनियाँ काटनी शुरू कीं, वह विशाल पेड़ भी कटकर गिर गया। बिना सोचे-समझे की गई मदद पेड़ के लिए घातक साबित हुई।
Moral
कोई भी कदम उठाने या मदद करने से पहले उसके परिणाम के बारे में जरूर सोचें।