एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक मेहनती किसान रहता था। वह अपने बगीचे की देखभाल बहुत प्यार से करता था। एक सुबह, जब वह अपने बगीचे का निरीक्षण कर रहा था, उसने देखा कि पेड़ के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा और सुनहरा आम लटका हुआ है। वह आम दिखने में बहुत ही सुंदर और रसीला था।
सोमू ने उत्साह से सोचा, "अगर मैं इस एक आम को तोड़कर बाज़ार में बेच दूँ, तो मैं अपने परिवार के लिए बहुत सारी चीज़ें खरीद सकता हूँ!" उसने आम तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उसका डंठल बहुत मज़बूत था। उसने जितना भी खींचा, आम टस से मस नहीं हुआ।
सोमू ने पहले एक लंबी छड़ी से उसे हिलाने की कोशिश की, पर नाकाम रहा। फिर उसने अपनी पत्नी मल्लिका को बुलाया। दोनों ने मिलकर ज़ोर लगाया, "एक, दो, तीन!", लेकिन आम नहीं हिला। इसके बाद उनका बेटा कपिलन भी आ गया। उसने अपने पिता का हाथ पकड़ा और दोनों ने मिलकर खींचा, फिर भी आम वहीं टिका रहा।
फिर उनकी बेटी नीला भी आ गई। पूरा परिवार मिलकर खींच रहा था, पर वह विशाल आम टस से मस नहीं हो रहा था। यह सब देख रहा सोमू का वफादार कुत्ता 'मनी' और छोटी सी बिल्ली 'चिन्नू' भी दौड़कर आ गए। सबने मिलकर एक टीम की तरह काम करने का फैसला किया। मनी ने अपने मुँह से सहारा दिया, चिन्नू ने पेड़ की टहनी को पकड़ने में मदद की, और सबने एक साथ मिलकर ज़ोर लगाया।
"हइसा... ज़ोर लगा के!" सब एक साथ चिल्लाए, और अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ वह सुनहरा आम टहनी से टूटकर नीचे गिर गया! खुशी के मारे सब नाचने लगे।
नीला हँसते हुए बोली, "देखा! आप सबने इतनी कोशिश की पर नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही मेरी प्यारी बिल्ली चिन्नू आई, काम आसान हो गया!"
कपिलन ने जवाब दिया, "नहीं नीला, मनी कुत्ते की ताकत भी इसमें थी। उसके बिना हम यह नहीं कर पाते।"
तब सोमू ने मुस्कुराते हुए कहा, "बच्चों, यह सिर्फ बिल्ली या सिर्फ कुत्ते की वजह से नहीं हुआ। जब हम अलग-अलग कोशिश कर रहे थे, तब यह नहीं हुआ। लेकिन जब हम सब एक साथ, एक ही लक्ष्य के लिए मिलकर काम करने लगे, तब हम सफल हुए। एकता में ही असली शक्ति है!"
Moral
एकता में ही बल है; मिलकर काम करने से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है।