एक बहुत ही सुंदर जंगल में एक साफ़ पानी की नदी बहती थी। उस जंगल में स्नोवी नाम का एक बहुत ही सुंदर सफेद घोड़ा रहता था। स्नोवी न केवल सुंदर था, बल्कि वह बहुत दयालु भी था और सबकी मदद करता था।
एक बार, ब्रूटस नाम का एक विशाल और लालची जंगली सूअर जंगल में आया। उसने नदी का पानी देखा और चिल्लाकर कहा, "अब से यह पानी सिर्फ मेरा है! कोई भी यहाँ नहीं आएगा!" उसने नदी के रास्ते में एक भारी लकड़ी का लट्ठा डाल दिया ताकि कोई पानी न पी सके।
धीरे-धीरे गर्मी बढ़ी और जंगल के बाकी सारे तालाब सूख गए। सभी जानवर प्यास से तड़पने लगे। लेकिन ब्रूटस के कारण नदी का पानी भी मिलना मुश्किल हो गया था। सभी जानवर डर के मारे चुप थे।
स्नोवी को यह देखकर बहुत दुख हुआ। उसने सोचा, "अगर मैंने कुछ नहीं किया, तो सब प्यासे मर जाएंगे।" एक रात, जब ब्रूटस गहरी नींद में सो रहा था, स्नोवी ने नदी का रास्ता साफ करने की कोशिश की। तभी ब्रूटस जाग गया और गुस्से में स्नोवी की तरफ दौड़ा!
उस लड़ाई के दौरान, स्नोवी को बचकर भागने के लिए कोयले और काली मिट्टी वाले गड्ढे से होकर गुजरना पड़ा। जब वह बाहर निकला, तो उसके सफेद शरीर पर काली मिट्टी के कारण लंबी काली धारियां बन गई थीं।
बाकी जानवरों ने हिम्मत जुटाई और मिलकर ब्रूटस को जंगल से भगा दिया। जंगल में फिर से शांति छा गई। लेकिन स्नोवी अपने शरीर पर उन काली धारियों को देखकर उदास हो गया। उसने सोचा, "अब मैं सुंदर नहीं रहा।"
तभी जंगल के सबसे बुजुर्ग हाथी ने कहा, "स्नोवी, तुम उदास मत हो। ये धारियां तुम्हारी सुंदरता कम नहीं करतीं, बल्कि ये तुम्हारी बहादुरी का पदक हैं। ये दुनिया को बताएंगी कि तुम कितने वीर हो!"
धीरे-धीरे वे निशान पक्के हो गए और सुंदर काली धारियों में बदल गए। स्नोवी अब एक साधारण सफेद घोड़ा नहीं, बल्कि एक गर्वित ज़ेबरा बन गया था।
Moral
मुश्किलों से लड़ते हुए जो निशान मिलते हैं, वे हमारे सम्मान का प्रतीक बन जाते हैं।