एक घने जंगल में पिप नाम का एक छोटा सा चींटा रहता था। गर्मी का मौसम था और पिप को बहुत तेज़ प्यास लगी थी। पानी की तलाश में भटकते-भटकते उसे एक बहती हुई नदी दिखाई दी। जैसे ही पिप पानी पीने के लिए किनारे पर झुका, उसका पैर फिसल गया और वह नदी की तेज़ लहरों में जा गिरा!
पिप चिल्लाया, "बचाओ! कोई मुझे बचाओ!" लेकिन उसकी आवाज़ पानी के शोर में दब गई। तभी पेड़ की एक डाल पर बैठी लूना नाम की एक सफेद कबूतर ने यह सब देख लिया। पिप को डूबते देख, लूना ने तुरंत एक बड़ा पत्ता तोड़ा और उसे पिप के पास पानी में डाल दिया।
पिप ने उस पत्ते को पकड़ लिया और धीरे-धीरे तैरते हुए किनारे तक पहुँच गया। सुरक्षित होने के बाद, पिप ने ऊपर देखा और कहा, "लूना, तुमने आज मेरी जान बचाई है, तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद!" लूना ने मुस्कुराकर सिर हिलाया।
कुछ दिनों बाद, एक शिकारी जंगल में आया। उसने देखा कि लूना पेड़ पर आराम कर रही है। शिकारी ने अपना धनुष उठाया और लूना पर निशाना साधने लगा। पास ही मौजूद पिप ने यह देख लिया। उसने सोचा, "मेरे दोस्त को बचाना ही होगा!" पिप तुरंत शिकारी के पैर की ओर दौड़ा और उसे ज़ोर से काट लिया।
दर्द के मारे शिकारी हड़बड़ा गया और उसका निशाना चूक गया। तीर लूना के पास ज़मीन पर जा गिरा। शोर सुनकर लूना जाग गई और शिकारी डरकर वहाँ से भाग गया। लूना ने देखा कि उस नन्हे से चींटे ने उसकी जान बचाई है। उस दिन के बाद से, कबूतर और चींटा पक्के दोस्त बन गए।